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कहानी- मतलबी दुनिया(नारी विशेष)

Ramesh Babu 20 Feb 2025 कहानियाँ समाजिक जीवनी 38550 0 Hindi :: हिंदी

इस कहानी और पात्र में किसी भी नारी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है। अपितु उनके ऊपर हो रहे हैं। अमानवीय व्यवहार( बाल विवाह, देहज, कुप्रथा ,) का विरोध वे स्वयं सही निर्णय लेने का अधिकार इसके लिए स्वयं को आगे आना होगा है। क्योंकि- सोच के सोचो वही नारी- मां, बहन ,बेटी के रूप में!  पुरुषों की भी जिम्मेदारी है ।अगर नारी नहीं रहेगी तो पुरुषों का भी अस्तित्व भी गायब हो जाएगा।
आईये कहानी के माध्यम से समझते है।

बरसात का मौसम था। छोटी- छोटी फुहारे आसमान से
जमीन पर गिर रही थी ! अकाशीय बिजली चमक रही थी।  करीब- करीब शाम के 8:00 बज चुके थे!

श्याम खाना खाकर सोने वाला था। कि पड़ोस के घर से आवाज आई चारपाई पर लेटा कर ले चलो । श्याम सोचा आखिर क्या हुआ। टॉर्च बे छाता लेकर निकले पड़ा।

चार पांच व्यक्ति पहले से बहा खड़े हुए थे। उन्होंने बताया कि कल्लू काका की बहु मंगू की बीवी पेट से( प्रेग्नेंट ) हे। मंगू की शादी पास के दूसरे गांव के हरिया की लड़की बुलबुल से हुई थी।

बह पढने मे बहुत ही होनहार लड़की थी। गरीबी के चलते तथा गांव की गलत अवधारणाओं के कारण 14 वर्ष की उम्र में ही शादी कर दी गई थी। मंगू भी स्कूल जाता था।
अभी शादी को 1 साल हुए थे कि । अब बह मां बनने वाली थी।

प्रिय, पाठको- मैं यहां बताना चाहता हूं ।कि गांव से सड़क तक पहुंचने के लिए कच्चा पगडंडी रास्ता जो सड़क तक पहुंचने में 3 किलोमीटर दूर पड़ता था। जहां पैदल पहुंचने में 45 मिनट का टाइम लगता था । श्याम के गांव से होकर दूसरे गांव की जमीन  से होकर गुजर पढ़ता था । उन लोगों की जमीन से होकर गुजरने पर मरने मारने पर उतारु होते थे।
नहीं चाहते थे। कि हमारी जमीन में से होकर रास्ता निकले। विधायक द्वारा विधायक कोष से भी सहायता प्रदान करने की बात कही लेकिन पड़ोस के गांव वालों ने कोर्ट द्वारा स्टे लगवा दी गई।

गांव वालों ने शासन -प्रशासन, अखबार, न्यूज़, से भी गुहार लगाई। राजनेताओं तक भी बात पहुंचाई। लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकला।

अब आगे बताना चाहते हैं कि। गर्भवती महिला को चारपाई पर चार कंधो पर रखकर ! ऊपर त्रिपाल( विशेष तरह की पन्नी बरसात से बचने के लिए )सास और अन्य महिला भी साथ में चल दिए ।

जैसे- तैसे पक्की सड़क तक पहुंचाया गया। अब मुसीबत थी। हॉस्पिटल ले जाने के लिए साधन(वेन) की। एक व्यक्ति जाकर दूसरे गांव से जैसे- तैसे हॉस्पिटल ले जाने वाले साधन की व्यवस्था की गई जिसमें एक घंटा गुजर चुका था।

पक्के रोड से हॉस्पिटल की दूरी अभी 34 किलोमीटर बाकी थी। तथा पक्की सड़क भी जगह -जगह खुदी हुई थी। जिससे गाड़ी से खटखट धक, धक की आवाज सुनाई दे रही थी।
इधर बुलबुल के पेट का दर्द भी बढ़ता ही जा रहा था। ड्राइवर द्वारा गाड़ी सरपट रोड पर चले रही थी। तकरीबन एक घंटा बाद हॉस्पिटल में पहुंच गये। 
प्रसूती कक्ष में भर्ती कराया गया।
अब तक 10:45 PM का टाइम हो चुका था। गांव से हॉस्पिटल पहुंचने में 2 घंटे 45 मिनट बीत चुके थे। सभी ने राहत की सांस ली। आधे घंटे बाद नर्स बाहर निकली। मंगू ने कुछ कहना चाहा।
नर्स- खून बहुत वह चुका है ।हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं।
और वापिस प्रसूति कक्ष की तरफ लौट जाती है।
फिर थोड़ी देर बाद मातम का सैलाब ?

सास बुलबुल की रोती हुई बाहर निकली ।मंगू ने पूछा मां क्या हुआ।
मां- बहू नहीं रही। नर्स बाहर निकली। मंगू ने कहा- सिस्टर -सिस्टर क्या हुआ मेरी बीवी को।

सिस्टर- आई एम सॉरी। डेढ़ घंटा पहले भी अस्पताल तक पहुंच जाते तो मैं कुछ कर पाती। साथ ही कम उम्र में बच्चे की मां बनने से ब्लड का ज्यादा रिसाव हो गया।

और चारों तरफ रोने-  बिलखने का मातम सा छा गया।
बरसात भी बंद हो चुकी थी। काले बादल छट चुके थे। शायद बरसात को भी बुलबुल की जिंदगी रास नहीं आ रही थी । कुछ दिनों बाद मंगू विस्ता उठाकर स्कूल की तरफ जाता हुआ दिखाई दे रहा था। शायद गलती का कुछ एहसास हुआ।



📢  प्रिय पाठको, मेरे द्वारा लिखी गई कहानी पर
अपना सुझाव कमेंट बॉक्स में लिखकर भेजें?
मुझे आप सभी का इंतजार रहेगा। ताकि मेरा हौसला यूहि  बढ़ता रहे।


लेखक - रमेशबाबू लोधा

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