Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

अहंकार

Dr. Arun Kumar Shastri 23 Apr 2023 आलेख समाजिक आप बीती जग बीती 27917 0 Hindi :: हिंदी

अहंकार *
	मानवता का आदर्श मर्यादा से अभिसिंचित होता है । मनुष्य का मनुष्य के प्रति  व्यवहार मर्यादा से ही आबद्ध रहता है, शरीर में जैसे त्वचा का आवरण है, न भाई , उसी प्रकार मनुष्यता में मर्यादा का आवरण प्रतिबद्ध  रह्ता है  यही महत्व पूर्ण है । यही जीवन की सार्थकता के लिए इसकी रक्षा के लिए प्रत्येक मानव का परम कर्तव्य है । श्री की स्थापना अहंकार के साथ असम्भव है | और प्रयास क्या रह्ता है मनुष्य का, सभी को अपने संरक्षण में रखें । अपने अंकुश में रखे | ये तो बडी अजीब स्थिति है खुद का खुद पर नही नियन्त्रण मन का पन्छी सोच रहा है कैसे कर लू जग संतर्पण | 
	अविकारी होना अस्मभव है विकारों के साथ जीना एक दम सहज है , गुरु तुम्हारी इसी स्थिति को इस कमजोरी को भली भान्ति समझता है रोज रोज एक ही मन्त्र देगा - अविकारी बनो , अविकारी बनने क सरल उपाए समझाता है , सब कुछ छोड उसकी शरण में आ जाओं अर्थात अपने पर अपना नियन्त्रण छोड गुरु के अधिकार में रहो , तुम्हारी स्थिति , शून्य और गुरु की - सर्वागीण - ऐसा कैसे सम्भव है इश्वर के मनुष्य को स्वतंत्र बनाया है - किसलिए ? क्या यही काम रह गया | बुद्धि दी - क्या इसी लिए ज्योति दी क्या इसीलिए रसना जिव्हा कर्ण नासिका किसलिए - ? इसी लिए के आप किसी के गुलाम बन जाओ ? न रे मुन्ना न - किसी से ज्ञान लेना उसका कृतग्य होना महत्वपूर्ण है लेकिन कृतज्ञता के मध्य गुलामी न रे मुन्ना ना | ये स्वीकार कर लेना अतिशयोक्ति होगी , करते हैं प्रतिदिन असंख्य | फेंसला सबका स्वयं का होता है | यही है सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग | 
	गुरु कह्ता है - निर्विकार अवस्था अच्छी है - बिल्कुल सही मानने वाली बात है - अब आप निर्विकारी होने के लिए प्रयास कर रहे , नही हो रहा , होगा भी नही , फिर क्या गुरु गलत है , अरे नही मुन्ना गुरु कभी गलत हो नही सकता | फिर क्या मैं पापी हुँ , ये भी गलत , फिर क्या ये मेरे बस से बाहर है , मैं क्या कभी निर्विकारी नहीं हो पाऊँगा | ये भी गलत - फिर सही क्या है | देखो हम जिस चीज के पीछे भागते हैं वो चीज सदा से हम से उत्ती दूर भागती , लेकिन शान्त स्वभाव से उसका स्मरण करते करते एक दिन मन अभायसी हो जाता है जिस की इच्छा होती उसका  | यही स्थिति है उस भाव , वस्तु , को काबु करने का यही सही समय है उसको फटाक से प्राप्त करने का | 
	अहंकार के बिना मनुष्य का कोई आकार नही हो सकता लेकिन उसका भाव उसके भाव को अपनी अभिव्यक्ति से आगे रख कर चलना सीख जाना सही मानवीय उपलब्धि है | 
 	ये भाव ये गुण ये मन्त्र जिसने समझ लिया वही अविकारी , निरंकारी , निर्विकल्पा हो जाता उसी क्षण |

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

छेड़ते हुए लड़के ने लड़की से कहा- तुम कितनी सुन्दर हो तुम्हारी आँखे तो ऐसी हैं जैसे समुन्दर हो तम्हारे होठ लाल ऐसे हैं जैसे चुकन्दर ह� read more >>
हमारे देश में बहुत से महापुरुष हुए, बहुत से नेता हुए जिन्होने देश के लिये अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये, सिर्फ देश की एकता व अखण्डता क� read more >>
किसी भी व्यक्ति को जिंदगी में खुशहाल रहना है तो अपनी नजरिया , विचार व्यव्हार को बदलना जरुरी है ! जैसे -धर्य , नजरिया ,सहनशीलता ,ईमानदारी read more >>
Join Us: