साहित्य लाइव से जुड़कर जो प्रसन्नता हो रही है, उसे शायद शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाऊँ।
फिर भी इतना कहना चाहूँगा कि इस मंच के माध्यम से हम देशभर से जुड़ सकते हैं और अपने विचार साझा कर सकते हैं।
चाहे पारिश्रमिक मिले या न मिले, कम से कम हमारे विचार लोगों तक पहुँच तो रहे हैं।