Meenakshi Tyagi 07 Jul 2023 आलेख देश-प्रेम Shivani singh, Chanchal Chauhan 44814 0 Hindi :: हिंदी
मैं उस भारत से आती हू जहां पर बचपन में ही बच्चों को खेल -खेल में अपने हिंदू समाज के सभी रीति रिवाजों को बहुत ही अच्छे तरीके से सिखा दिया जाता था ताकि बड़े होकर कोई तकलीफ न हो। गांव के इस परिवेश में शहर जाने की इतनी जरूरत कभी किसी को नही होती थी। सब काम चाहे वो लुहार का हो, सुनार का, बढ़ई का हो, शिक्षक का हो, मिस्त्री का हो, या फिर कोई भी ..जितनी जरूरतें थी उन सब को पूरा करने के लिए हर व्यक्ति गांव में ही होता था। इतना सभ्य समाज अब कही भी नही है जितना 80 और 90 ke दशक में था। पर आज जब गांव जाती हूं तो बहुत दुख होता है। वहां अब बड़े बुजुर्गो के पास पक्के मकान पक्की सड़कें और सभी आधुनिक सुविधाएं तो है, पर दादी मुझे कहानी सुना दो, नानी मेरी प्यारी नानी कहने वाले कोई भी नही है। तो वो बच्चे कैसे सीखेंगे अपने हिंदू समाज के रीति रिवाज।हम सब गांव में ही पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़े हुए लेकिन आज तो छोटे बच्चे ही सिर्फ और सिर्फ इंग्लिश मीडियम में ही पढ़ेंगे तो सफल होंगे अन्यथा वो अपने जीवन में कुछ नही कर पाएंगे, इस सोच के साथ समाजबागे बढ़ रहा है, तो फिर कैसे हमारे बच्चें अपने हिंदू समाज के सिद्धांतों को जानेंगे। सोचिए और बताइए । जारी है ....