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भारतीय समाज-विविधता में एकता

संदीप कुमार सिंह 13 May 2023 आलेख समाजिक मेरा यह आलेख समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 51580 2 5 Hindi :: हिंदी

भारतीय समाज में विविधता में एकता है। भारतीय समाज में कुछ खामियों के बावजूद गुणवत्ता है। यहां अनेक धर्मों सम्प्रदायों के लोग रहते हैं।
औपनिवेशिक दौर में ही एक विशिष्ट भारतीय चेतना ने जन्म लिया। उपनिवेशिक शासन ने पहली बार पूरे भारत को एकीकृत किया एवं पूंजीवाद आर्थिक परिवर्तन एवं आधुनिकीकरण की ताकतवर प्रक्रियाओं से भारत का परिचय कराया।
एक तरह से जो परिवर्तन लाए गए उन्हें पलटा नहीं जा सकता था। समाज वैसा कभी नहीं हो सकता जैसा पहले था। परन्तु उस युग का एक विरोधाभास सच यह भी है कि उपनिवेशवाद ने ही अपने शत्रु’राष्ट्रवाद’ को जन्म दिया।
ऐतिहासिक तौर पर, भारतीय राष्ट्रवाद ने ब्रिटिश उपनिवेशवाद के अंतर्गत आकार लिया। उपनिवेशवाद प्रभुत्व के साझे अनुभवों ने समुदाय के विभिन्न भागों को एकीकृत करने एवं बल प्रदान करने में मदद की।
हमारे इतिहास की विडम्बना है कि उपनिवेशवाद एवं पाश्चात्य शिक्षा ने ही परंपरा की पुनः खोज को प्रोत्साहन प्रदान किया।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)
बिहार

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संदीप कुमार सिंह
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