संदीप कुमार सिंह 14 Jun 2023 आलेख देश-प्रेम भ्रष्टाचार, जनता, समस्या, सैलाब,तैरना, मजमा, भलाई, स्वार्थ, शासन, प्रणाली 28295 0 Hindi :: हिंदी
आज समाज में भ्रष्ट लोगों की कमी नहीं है। जहां देखें वहीं दो_चार के मजमा में नजर आ जाते हैं। आज हरेक जन स्वार्थ के वशीभूत होकर चलना चाहते हैं। अब सरकार हैं वे देश तथा जनता की भलाई के लिए होते हैं। पूरी शासन प्रणाली है जिसमें सरकारी कर्मचारी वेतन पर नियुक्त किए जाते हैं। जिनका काम है जनता के काम को सुचारू रूप से करें तथा जनता के लिए अत्यधिक सुलभ सुविधा व्यवस्था पेश करें। लेकिन यहां ठीक विपरीत होता है जनता को परेशान करना ही सरकारी महकमे के कर्मचारी गण अपना मुख्य कार्य समझते हैं। नेतागण व राजनीतिक सत्ता सब अपने _अपने खजाने को भरने के चक्कर में भ्रष्टाचार में लिप्त है। अब जब प्रहरी ही दुश्मन बन जाए तो ऐसे में भला देश और जनता कैसे सुरक्षित रह सकती है। जिनका काम ही है जनता की सेवा करना जिसके लिए उनको सरकारी खजाने से वेतन भी दिया जाता है, लेकिन वे जनता को परेशान करना ही अपना हक समझते हैं। अब यहां पर एक सिद्धांत काम कर जाता है की हरेक बात का एक हद होता है। जब पानी सर के ऊपर से बहेगी तो जो तैरना नहीं जानते हैं वे भी जान बचाने की खातिर तैरने का प्रयास अवश्य करते हैं। ठीक भ्रष्टाचार के खिलाफ भी लोगों का सब्र जवाब दे रहा है। जनता जाग उठेगी और एक विशाल जन सैलाब के साथ सरकार के खिलाफ दृढ़ आंदोलन के माध्यम से तख्तो पलट कर के रहेगी। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....