संदीप कुमार सिंह 01 May 2023 आलेख राजनितिक मेरा यह आलेख समाजिक हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 32922 0 Hindi :: हिंदी
हमारा संविधान मानवता का पोषक है। वह किसी भी संप्रदाय या व्यक्ति को समाप्त करने की धमकी नहीं देता, ना ही ऐसा करने के लिए किसी एक व्यक्ति या व्यक्ति के समूह को आदेशित करता है । संविधान हमें कदम कदम पर हर व्यक्ति और व्यक्ति समूहों के हितों की रक्षा करता हुआ प्रतीत होता है।यह दृष्टि वेदों की देन है।जो इस देश की माटी की सोंधी सुगंध में इस प्रकार रच बस गई है कि उसे इस से अलग नहीं किया जा सकता।भारत के इस मानवतावाद ने भारत में एक सार्वभौम धर्म की स्थापना कराई। यह सार्वभौम धर्म (सारे भूमंडल के प्राणियों के साथ पक्षपात रहित न्याय पूर्ण आचरण करने वाला)वैदिक धर्म ही है।महर्षि दयानंद कहते हैं चूकि ईश्वर एक है,अतः धर्म भी एक है,और ये वेद धर्म है। 5000 वर्ष पूर्व वैदिक धर्म के अलावा और कोई धर्म नहीं था। महर्षि दयानंद जी का मानना था मैं ऐसे धर्म में विश्वास करता हूं जो सार्वभौम है और जिसके सिद्धांत सभी मनुष्य सत्य रूप से स्वीकार करते हैंं।इस सार्वभौम धर्म से संप्रदायों का जन्मजात वैर है। संप्रदाय इस सार्वभौम धर्म के रूप में छद्मवेश धारण करके हर समय मानव और मानव समाज का अहित करते रहें हैं। संप्रदाय व्यक्ति की मिथ्या महत्वाकांक्षाओं निहित स्वार्थों और स्वमताग्रही स्वभाव के कारण जन्म लेते हैं।इसलिए ये मूलत: किसी अन्य संप्रदाय का अहित करने के लिए ही जन्म लेते हैं।सार्वभौम धर्म व्यक्ति के अंत:करण को शुद्ध और पवित्र रखता है। इसी धर्म से अनुप्राणित राष्ट्रधर्म (राजनीति) भी लोगों को उन्नत मानव समाज का निर्माण करने के लिए अनुप्रेरित करता है।इसलिए ऐसे सार्वभौम धर्म की स्थापना करना और उसे भारतीय राजनीति का आदर्श बना देना हमारे संविधान का वास्तविक उद्देश्य है। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....