Poonam Mishra 30 Mar 2023 आलेख समाजिक जीवन के पल दो पल 34229 0 Hindi :: हिंदी
हमारी जिंदगी भी एक किताब की तरह होती है जिसमें मुझे यह नहीं पता होता है कि अगले पन्ने पर क्या लिखा होगा और हमें क्या ज्ञान प्राप्त होगा कभी-कभी किसी पन्ने को पढ़ कर बहुत खुशी होती है तो कभी-कभी किसी पन्ने को पढ़ कर मन बहुत ही दुखी हो जाता है और अतीत की यादों में कहीं खो जाता है लेकिन अगर हम अपने जीवन के अगले फल यानी अगले पन्नों पर नहीं पहुंचेंगे तो हमें कैसे पता चलेगा कि आगे के पन्ने पर क्या लिखा होगा स्वरचित लेखिका पूनम मिश्रा