Afsana wahid (moin raza ghosi) 27 Jun 2025 आलेख प्यार-महोब्बत Afsana wahid, poetry, artikal, story, shairy, blog writer, content writer, etc 16094 0 Hindi :: हिंदी
--- माँ की खामोश ताक़त: जो शब्दों में नहीं दिखती कुछ रिश्ते शब्दों के मोहताज नहीं होते। वे खामोशी में पलते हैं, आहिस्ता-आहिस्ता ज़िंदगी में रच-बस जाते हैं। उनमें सबसे पहला और सबसे गहरा रिश्ता — माँ का होता है। हम माँ को अक्सर उस रूप में देखते हैं जो हमें गोद में उठाती है, हमारी थाली परोसती है, स्कूल भेजती है, हमारे लिए दवा लाती है। पर शायद ही हम कभी रुककर उस मौन बलिदान को समझते हैं जो उसकी हड्डियों में बसा होता है। माँ की ताक़त शब्दों से कहीं ज़्यादा गहरी होती है। --- ✦ जब वो कुछ नहीं कहती, तब वो सबसे ज़्यादा कह रही होती है एक बच्चा जब उदास होता है, तो माँ कई बार कुछ नहीं पूछती। वो बस सर पर हाथ फेर देती है। उसका ये स्पर्श, बिना कहे कह देता है — “मैं हूँ न तुम्हारे साथ।” जब हम ग़ुस्से में होते हैं, माँ चुप रहती है। जब हम थक जाते हैं, माँ हमारी थकान अपने कामों में ढाल देती है। उसकी खामोशी — शिकायत नहीं होती। बल्कि वो एक ढाल होती है, जो हर चोट को अपने अंदर समेट लेती है। --- ✦ हर रसोई में जलते हुए गैस के साथ एक माँ भी जलती है रोज़ रोटियाँ बनाते वक़्त माँ की उँगलियाँ भी जलती हैं। पर वो कभी नहीं दिखाती। एक माँ की तक़लीफ़ अक्सर उसके आँचल में छिप जाती है। उसके पैरों की थकान, उसकी पीठ का दर्द, उसकी अधूरी नींद — इनका कोई हिसाब नहीं होता। क्योंकि वो जानती है कि उसका हर काम किसी की ज़रूरत पूरी कर रहा है। कभी-कभी तो लगता है कि माँ ख़ुद को इतना पीछे कर देती है, कि वो अपनी ही ज़िंदगी में एक साइड कैरेक्टर बन जाती है। --- ✦ माँ की ताक़त उसकी ‘कमज़ोरी’ में छिपी होती है लोग कहते हैं माँ बहुत इमोशनल होती है, जल्दी रो पड़ती है। लेकिन क्या आप जानते हैं — किसी के लिए पूरी तरह टूटकर रोना, अपने आँसू किसी और के दर्द के लिए बहाना, कमज़ोरी नहीं, हिम्मत की निशानी होती है। माँ की ताक़त उसकी संवेदनशीलता में है। उसके रोने में, उसके माफ़ कर देने में, उसके बार-बार गले लगाने में। वो ग़लतियाँ माफ़ कर देती है, जिन्हें दुनिया ताउम्र सज़ा देती। --- ✦ वो सिर्फ माँ नहीं, एक औरत भी है — जो चुपचाप सब सहती है हम अक्सर भूल जाते हैं कि माँ भी कभी एक लड़की थी। उसकी भी कोई पसंद थी, कोई ख्वाब था, कोई ऐसी दुनिया थी जहाँ वो सिर्फ अपने लिए मुस्कुरा सकती थी। लेकिन धीरे-धीरे, किसी की बीवी, फिर किसी की माँ बनते-बनते, वो अपनी पहचान किसी लॉकर में रख आती है — जिसकी चाबी वो कभी ढूँढती ही नहीं। पर माँ की यही चुपचाप खो जाना, उसे ताक़त देता है। वो बिना ताज के रानी बन जाती है। --- ✦ माँ को समझना हो, तो उसके जाने का इंतज़ार मत करो कई बार हम माँ को तब समझते हैं जब वो पास नहीं होती। उसके हाथ का खाना तब याद आता है जब वो रसोई नहीं चलाती। उसका सहेजना तब याद आता है जब हम अकेले किसी शहर में चुपचाप रोते हैं। लेकिन क्या ही अच्छा हो, अगर हम उसे उसी वक़्त समझ पाएं जब वो हमारे साथ है — जब वो रोटियाँ सेंक रही है, बालों में तेल लगा रही है, या दरवाज़े पर खड़ी कह रही है, “देर मत करना।” --- ✦ एक आख़िरी बात... अगर आपकी माँ पास है, तो उसके हाथ पकड़िए, उसकी आँखों में देखिए और बिना किसी मौक़े के, बस कह दीजिए — "आपकी खामोश मोहब्बत मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी ताक़त है।" क्योंकि माँ को शब्दों की ज़रूरत नहीं, लेकिन माँ के लिए शब्द देना भी ज़रूरी है। (writer, afsana wahid ,)