किशोर सिंह 30 Mar 2023 आलेख बाल-साहित्य सावन का सूरज 113629 0 Hindi :: हिंदी
यह उस समय कि बात है जब में 12-13 बर्ष था सावन का महिना चल रहा था हल्की हल्की बारिश हो रही थी हमें चाय पिने का मन हो रहा था मेने मां से कहा कि चाय बना दो ओर मेरी मां चाय बनाने लगी ओर कहा कि अगर बारिश थम जाये तो हम खेत पर जायेगे भैस के लिए चारा लेनें हम चाय पिने लगे और बातों ही बातों में बारिश थम गई और बादलो के बीच में से सूरज बाहर निकल आया और हम खेत कि तरफ चल दिये तो हमे बीच रास्ते मे एक ओरत मिली ओर बोली क्यो रे बहन कहा जहा रही हो तो मेरी मां ने धिमे स्वर से बोली कही नही बहन बस भैस के लिए चारा लेनें जा रही हु तो उस ओरत ने कहा देख बहन ऊपर आसमान में कितने काले बादल छाह रह है क्या पता बिच रास्ते मे बारिश हो जाए ओर तुम्हारा बच्चा भी तो साथ है मेरी मां ने कहा हम जल्दी ही वापिस आ जायगे में ओर मेरी मां खेत कि तरफ चल दिये फिर मेने कहा कि अगर बीच रास्ते मे बारिश आ गई तो हम क्या करेंगे तो मेरी मां कहने लगी बेटा में तुम्हारे साथ हू ना मुझे एक नई उम्मीद मिल गई हमे बातों ही बातों मे हमें पता हि नही चला की हम कब खेत मे पहुंच गये तो मेरी मां ने कहा बेटा तू इस निम के पेड के निचे बेट जा मे जल्दी से चारे को इक्कठा करती हु मेरी मां जैसे ही चारा इक्कठा करने लगी वैसे ही जोर से बारिश होने लगी ओर बिजली कडकने लगी मेरी मां भागी-भागी उस निम के पेड के पास पहुंची मै घबराया हुआ था मेरी मां बोली बेटा घबरा क्यो रहा है यह बारिश जल्द ही बंद हो जायगी हम घर चले जायगे पर ये बारिश थमने का नाम भी नहीं ले रही थी बल्की ओर तेज हो रही थी मेरी मां सहमी हुई थी ओर मुझसे कहने लगी बेटा भगवान ऊपर भरोस रख हम जल्द ही घर पहुंच जाउंगे हमें बैठे-बैठे 2-3 घंटे हो चुके पर बारिश रूकने बजाय ओर तेज हो रही थी बिजली कडक रही थी बादल गरज रहे हम पेड के निचे बैठे डर रहे हमने आगे बढने का फैसला किया हम इतने तेज बारिश मे घर कि तरफ चल दिये हमने देखा कि एक बस आ रही है हमारे मन में एक उम्मीद जगी कि अब हम जल्दी से घर पहुंच जायगे पर बस तो इतनी तेज बारिश में रूकी ही नही ओर हमारी सारी आशाए टूट चूकी थी तो भी हम आगे बढते रहे हमने देखा कि वहा कुछ बना हुआ हैं हमारे जहन के अदर फिर एक उम्मीद जगी ओर हम भागे-भागे उस झोपडी के अदर चले गये ओर मेने कहा मां ये बारिश कब बंद होगी बेटा सब्र कर जल्द ही ये बारिश थम जाएगी हम लोग बैठे ही थे कि हमारे पास एक कुता आकर बैठ गया ओर हमारी तरफ देखने लगा मानो वो भी बारिश रूकने का इतजार कर रहा हो अब हम तीन लोग हो चुके थे ओर घर जाने की सोच रहें थे मुझे इस बात की चिंता हो रही थी कि मेरे घर वाले दुःखी हो रहे होगे बैठे-बैठे काफी समय हो गया था अब बारिश भी रूकने लगी अब शाम के चार बज चुके थे अब बारिश पूरी तरह से रूक गई थीं ओर सावन का सूरज हमारे सामने आकर उसकी किरणों को ऐसे फैला रहा था कि जैसे हमारे ऊपर हस रहा हो ओर वो कुत्ता भी अब खडा हो गया झोपडी से निकल कर घर की तरफ चल दिया ओर हम भी खडे हुए अपने घर की ओर बढने लगे👋👋। 💛💛किशोर सिंह राजपूत💚💚