मोती लाल साहु 06 Apr 2023 आलेख समाजिक दुख का कारण स्वयं का दोष को हम सुधार ले तो अभूतपूर्व सुख के भागी बन सकते हैं। 38852 0 Hindi :: हिंदी
जो दुख हम- झेलते हैं इस जीवन में, कहीं ना कहीं- कारण हम खुद ही हैं। अभूतपूर्व सुख- के भागी बन सकते हैं, निकाल दें- अपनी कमी इस जीवन से।। -मोती