Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

टूटते रिश्ते बिखरते संबंध

akhilesh Shrivastava 21 May 2026 आलेख समाजिक समाज में आपसी रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हमारे प्रेम प्यार के रिश्ते अब टूट रहे हैं 3999 0 Hindi :: हिंदी

*टूटते रिश्ते बिखरते सम्बंध*

पुराने समय में पत्रों में सबसे पहले *अत्र कुशल तत्रास्तु* लिखा जाता था इसका भावार्थ यह था कि हम  यहां कुशल  हैं आशा है आप भी  वहां कुशल होंगे। उन दिनों परिवारों के नाते रिश्तेदारों व्यवहारियों,दोस्तों की खबर हालचाल एवं अन्य सुख दुख के समाचारों के आदान-प्रदान का प्रमुख माध्यम पत्र ही थे।

इन पत्रों में लिखीं पंक्तियां बहुत ही भावनात्मक,हृदस्पर्शी होती थीं पत्र के माध्यम से हम आपस में सभी प्रकार की घरेलू बातों एवं पारिवारिक समाचारों का आदान प्रदान कर लेते थे। 
एक ही शहर में रहने वाले हमारे करीबी रिश्तेदारों, व्यवहारियों, दोस्तों के परिवारों से हम तीज त्योहारों, या अवकाश के दिनों में उनके घरों में जाकर मिलते थे।स्थानीय   रिश्तों या परिचितों  के यहां हम आपस में कभी कभी  सपरिवार मिलने बैठने जाते थे।इस मेलजोल के कारण हम आपस में अपने सुख दुख बांट लेते थे एवं अपनी समस्याओं का आदान प्रदान कर उनका निराकरण करने का प्रयास करते थे। इन सामंजस्य मुलाकातों से हमारे परिवारों और परिचितों म़ें भावनात्मक प्यार प्रेम बना रहता था ।हमारी संतानें भी हमारे पारिवारिक रिश्तों परिचितों  के सदस्यों को पहचानतीं एवं जानती थीं।
 उस समय एक -दूसरे परिवारों के घर जाने के   लिए स्कूटर ,मोटर साईकिल, रिक्शा, तांगा, टेम्पो इत्यादि का उपयोग किया जाता था। आपस में मिलने जुलने के लिए किसी प्रकार की औपचारिक्ता ,निमंत्रण या आमंत्रण 
की आवश्यक्ता नहीं रहती थी। रिश्तों परिचितों में प्रेम -प्यार सद्भभावना  सहयोग का  विशेष स्थान था। इन सम्बंधों में पद ,धन वैभव की कोई महत्ता नहीं थी।इसीलिए ये सम्बंध चिरस्थायी होते थे।
                   समय के साथ साथ समाज में पाश्चात्य संस्कृति एवं आधुनिकता ने प्रवेश कर लिया संचार क्रांति के कारण हमारे बीच नये नये संचार साधन जैसे फोन ,मोबाइल,टी वी ,कम्प्यूटर  ,ने प्रवेश कर लिया। इन नये नये उपकरणों ने हमारे परिवार के/ सदस्यों को अपने आगोश में ले लिया। इनका उपयोग हमारे बीच वार्तालाप के लिए होने लगा.

             इक्कीसवीं सदी के आते ही समाज में धन, वैभव ,पद की महत्ता बढ़ गई और आधुनिकता एवं दिखावा की होड़ में हमारे परिचित एवं पारिवारिक नाते , रिश्ते ,बुरी तरह से बिखरते चले गये। इस कारण से हमारे  नाते रिश्तों में दूरियां बढ़ने लगीं और हमारे परिवारों के मेल -जोल ,प्रेम व्यवहार में मात्र औपचारिकता नजर आने लगी।

                हमारे घरों में परिवार के सदस्यों एवं बच्चों को टेलीविजन,मोबाइल,कम्प्यूटर इत्यादि ने घरों में कैद कर लिया ।अब धीरे धीरे परिचितों ,परिवारों रिश्ते-नातों में मेल मुलाकात का सिलसिला कम हो गया,और हमारे बीच दूरियां बढ़ गईं ।इसके परिणाम स्वरूप हम परिवारों के बीच प्रेम प्यार में कमी आने लगी और हमारे आपसी सम्बन्धों में  दिखावा नजर आने लगा।

                     हमारे आपसी सम्बंध अब महज गुड मार्निंग मैसेज और वाट्सएप चैट तक सीमित हो गये। जेन जी जनरेशन की पीढ़ी मोबाइल लेपटाप ,वाट्सएप ,यूं ट्यूब, इंस्टाग्राम ,रील वीडियो में लिप्त एवं व्यस्त रहती है इस कारण नई पीढ़ी के बच्चों की पारिवारिक समारोहों एवं रिश्ते के शादी विवाह में जाने में कोई रुचि नहीं रहती।वे  अपनी ही दोस्ती यारी निभाते हैं।
हमारी ये आखिरी पीढ़ी है जो आपसी नाते-रिश्ते एवं संबंधों को भली भांति निभा रही हैं।
            नई जनरेशन के इस बदलाव के कारण समाज में अब धीरे धीरे हमारे आपसी रिश्ते टूट रहे हैं और संबंध बिखर रहे हैं।।

अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट 
जयनगर जबलपुर ।।।।।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

छेड़ते हुए लड़के ने लड़की से कहा- तुम कितनी सुन्दर हो तुम्हारी आँखे तो ऐसी हैं जैसे समुन्दर हो तम्हारे होठ लाल ऐसे हैं जैसे चुकन्दर ह� read more >>
हमारे देश में बहुत से महापुरुष हुए, बहुत से नेता हुए जिन्होने देश के लिये अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये, सिर्फ देश की एकता व अखण्डता क� read more >>
किसी भी व्यक्ति को जिंदगी में खुशहाल रहना है तो अपनी नजरिया , विचार व्यव्हार को बदलना जरुरी है ! जैसे -धर्य , नजरिया ,सहनशीलता ,ईमानदारी read more >>
Join Us: