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युवा वर्ग मेंबढती आत्महत्या की प्रवृति

डॉ राजेंद्र यादव आजाद 07 Sep 2025 आलेख समाजिक सामाजिक आलेख 16819 0 Hindi :: हिंदी

दो  दिन पहले मैं फेसबुक देख रहा था तो आगे बढ़ते हुए मुझे एक युवा बुरी तरह से सोशल मीडिया पर गंदी गाली अपने परिजनों व रिश्तेदारों को देते हुए लाइव आता दिखाई दिया। ।जिज्ञासावश मैं उस लाइव को देखता रहा कि माजरा क्या है । कुछ समय बाद पता चला कि उस युवक ने जहरीला पदार्थ पी लिया है और वह अपनी मौत के तांडव को लाइव कर रहा है । मैं नहीं जानता था कि वह युवा कौन है कहां का था उसने सुसाइड क्यों किया । आज सोशल मीडिया से ही पता चला कि वह युवा विष्णु खाड राजस्थान के दौसा जिले के गुढा कटला का रहने वाला था जिसने लाइव आकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली । उसकी मौत का लाइव बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर गया।  आजकल इस सोशल मीडिया के युग में हर कोई व्यक्ति अकेला पड़ गया है।  हर कोई बस एकांत में बैठकर सोशल साइटों पर ही लगे रहते हैं यही नहीं अगर एक कमरे में चार व्यक्ति बैठे हैं तो वह भी आपस में बातें नहीं करके बस व्हाट्सएप फेसबुक या फिर किसी अन्य सोशल साइट पर ही लगे रहते हैं।  आज व्यक्ति एकांकी हो गया है आज एकाकीपन व आत्महत्या के बीच एक जटिल संबंध बन चुका है।  एकाकीपन की भावना लोगों को आत्महत्या की ओर धकेल रही है खासकर जब युवा वर्ग अपने जीवन में अर्थ व उद्देश्य की कमी महसूस करते हैं तब वह आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाते हैं । दिन प्रतिदिन लोगों में बढ़ रही अकेलेपन  की भावना उन्हें सामाजिक अलगाव की तरफ मोड़ रही है जिसके कारण वह अपने प्रिय जनों से अलग हो जाते हैं।  अनेकों बार एकाकीपन की भावना के कारण लोगों को आत्महत्या की तरफ मोड़ दिया जाता है वही मानसिक स्वास्थ्य अवसाद चिंता और तनाव की स्थिति व्यक्ति को आत्महत्या करने पर मजबूर कर देती है।. देश में मानसिक अवसाद के चलते 54 प्रतिशत आत्महत्या हो रही है वहीं  विद्यार्थियों पर शैक्षिक दबाव परीक्षा में असफलता माता-पिता की अपने बच्चों से अपेक्षा भी छात्रों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर रही है । राजस्थान के कोटा में कोचिंग करने वाले छात्र अत्यधिक मानसिक दबाव में असफलताओं के चलते आत्महत्या कर बैठते हैं। एक अध्ययन के अनुसार  देश भर में 23% आत्महत्या शैक्षणिक तनाव के चलते छात्र कर बैठते हैं।  वहीं सामाजिक और आर्थिक गरीबी बेरोजगारी सामाजिक बहिष्कार भेदभाव और परिवार में तनाव प्रेम संबंधों में असफलता या फिर प्रेम संबंध टूटने का डर व्यसन व नशा घरेलू हिंसा और लैंगिक भेदभाव भी युवाओं को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर देते हैं । दिन प्रतिदिन समाज में बढ़ रही आत्महत्या रोकने के लिए युवा वर्ग के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने उन्हें समर्थन और संसाधन प्रदान करने सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान करने की अति आवश्यक है।  शैक्षिक प्रणाली मे सुधार मां-बाप का प्यार और युवाओं के आत्मविश्वास को प्रबल करने के लिए ध्यान योग शिविरों के आयोजन के अलावा सोशल मीडिया से दूरी की आज बहुत ज्यादा आवश्यकता है ताकि युवा पीढ़ी अवसाद में आकर आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा  सके । मां-बाप को चाहिए कि वह अपनी संतान से अधिक से अधिक वार्तालाप करें उनके मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें एवं उन्हें अपना समर्थन दें बात बात पर टोका टाकी ना करें उनसे उनकी अपनी भावनाओं और समस्याओं पर खुलकर बात करें नकारात्मक विचारों को बढ़ाने वाली बातें नहीं करें सकारात्मक सोच को बढ़ावा दें ताकि युवा आत्महत्या करने का विचार ही अपने मन में ना ला पाए।। डॉ राजेंद्र यादव आजाद दौसा राजस्थान मोबाइल 94 1427 1288

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