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ज़िंदगी में रोते-रोते हम थक तो जाते हैं

Niharika Senapoti 20 Nov 2025 आलेख अन्य आँसू 8396 0 Hindi :: हिंदी

ज़िंदगी में रोते-रोते हम थक तो जाते हैं, लेकिन हमारे आँसू कभी खत्म नहीं होते। आप गिनती भी नहीं कर सकते कि आप ज़िंदगी में कितनी बार रोए हैं, क्या आपके आँसू खत्म हो गए हैं? दरअसल, ज़िंदगी एक अदृश्य सागर है, इसलिए दुःख में आँसू और खुशी में आँसू।

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