धीरे धीरे ही सही हृदय में आग सी जल तो रही है,
धीरे धीरे ही सही किताबे पढ़ते हुए रात ढल तो रही है,
धीरे धीरे अब ये फसल गल तो रही है,
धीरे धीर read more >>
1891,महू में हुआ जन्म एक ज्वाला का,
एक महान नायक और देश प्रेम की माला का,
पढ़ने का उसको मिला नही कोई भी अधिकार,
क्योंकि वो था एक अछूत और एक म� read more >>
किताब -ए दर्द में खो जाने को जी चाहता है,
ऐसी बेचैनी की रो जाने को जी चाहता है,
दर्द में गुजर गई सारी जिंदगी,
अब तो मौत की नींद सो जाने को ज� read more >>
वक्त के एक एक मिनट किमती है,
इन्हे आसानी से खोने मत देना।
जब तक मंजिल हाथ न लग जाए,
तब तक खुद को सोने मत देना।
जब भी दिखे सिगरेट पीते हुए � read more >>