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Prashant Kumar

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@ prashant-kumar
, Utter Pradesh

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My Articles

दिल चाहता है उनको तनिक पास बुला लें लव चूमके अबकी उने बांहों में उठा लें तन्हा किसी को छोड़ना यूं अच्छा नहीं है वो जाते हुए हमको भी आवा read more >>
क्या तेरी मुहब्बत के मुकाबिल नही हूं मैं क्यों आज तिरी वज्म मे शामिल नही हूं मैं। वो ख्वाब तुझे चैन से जीने नही देगा जिस ख्वाब में ते� read more >>
अहले हुस्न देकर खुद को कँगाल कर बैठे मुझ गरीब का इतना क्यों ख़याल कर बैठे। ऐसी वैसी तो कोई बात भी नहीं थी खांमखां तिरी बातों का मलाल क read more >>
इक दौर ऐसा आएगा कुछ ही साल भर में पत्थर मिलेंगे जालिम शीशागरों के घर में। जल्दी मिलेगी तुमको मंजिल सुनो तुम्हारी तुम मुश्किलें हो ज� read more >>
जो इश्क के दरिया में कभी पार नहीं होते वो लोग मुहब्बत के हकदार नहीं होते। उनसे भी कभी पूछो ये जिंदगी क्या चीज है बो जिनके कहीं कोई घर ब read more >>
हैरान था मैं आपको हैरान देखकर ऐसे तुम्हारे हुस्न का ऐलान देखकर। जब इश्क तोलने को तुम्हारा कहा गया मैंने नजर ही मोड़ ली मीजान देखकर। read more >>
जो लोग मिरे नाम से महबूब रहे हैं वो हल्का ए आगोश में तो खूब रहे हैं। कुछ ना मिला तो उसने मिरा नाम लिखा है खाली न कभी हाथ के मकतूब रहे हैं read more >>
कुछ इस तरह से अबकी सताया गया मुझे हँसने लगा तो फिर से रुलाया गया मुझे। हर शख्स जिंदा देखके हैरान था यहां कल फिर से खलबतों में बुलाया ग� read more >>
इन मयकदों काअबकी सारा हिसाब कर दे मेरे लहू की बूंदों को ही शराब कर दे। जालिम न चल कमर को अपनी दिखादिखा के ऐसा न हो ये मेरी नीयत खराब कर � read more >>
कोई तो याद मेरी कहानी रखे बेवजह अपनी आंखों मे पानी रखे। रब्त है जब उसे हर नई चीज से सांस क्यों फिर बदन में पुरानी रखे। क्यों न हो हादस read more >>
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