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Rani Devi
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Rani Devi
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@ rani-devi
, Himachal Pradesh
Hindi Lecturer in Government school GSSS Karoa Himachal Pradesh.
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वक़्त का पहिया
वक़्त का पहिया कारवाँ गुजर जाते हैं खंडहर शेष रह जाते हैं बेपनाह दर्द लिये अपनी जुबानी अपनी कहानी कह जाते हैं नितांत अकेलापन भी तो �
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श्रद्धा सुमन
श्रद्धा सुमन गौरवान्वित होता अचल धरा हिल उठती है भारत माँ के पूतों को जब शहादत मिलती है। पथ पे बिखरे कंकर तब भावुक हो उठत�
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व्यथित मन
व्यथित मन मेरा यह व्यथित मन ढूँढ रहा न जाने किसको कभी लगता है पिंजरे में बंद उस पंछी की तरह न जाने खोए हुए अनजाने सपनों की तस्व
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आखिर कब तक
आखिर कब तक ? गुलामी की जंजीरों में जकड़ी औरत आजादी का देखा न सपना उसके जुल्मों का खात्मा होगा आखिर कब तक ? जन्म लिया तो उसकी कर द
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खूबसूरत एहसास
खूबसूरत एहसास माँ, रब ने तुझे गढ़ने से पूर्व अनगिनत वेदों को पढ़ा होगा अनमोल बेशकीमती भावनाओं को न जाने किस दुनिया से �
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कोमलता की जननी
कोमलता की जननी देखो दुनिया वालो भारत की सुंदर तस्वीर दिखाती हूँ यह है देवभूमि, मैं इसके अनोखे राज बताती हूँ ! दुनि�
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नमन मेरी मातृभाषा
नमन मेरी मातृभाषा नमन उस भाषा को जो हमें संस्कार देती है नमन मेरी हिन्दी को जो भावों को संचार देती है ! बड़ी
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अफगानी बाला
अफगानी बाला मृग सी चंचल लाचार निगाहों में इक्कीसवीं सदी की बेबस माँ की बाँहों में अफगानी हर बाला की अस्मत को लुट ते देख। विश्व �
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