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Raysingh Madansingh Rauthan

Raysingh Madansingh Rauthan

Raysingh Madansingh Rauthan

@ raysingh-madansingh-rauthan
, Maharashtra

Employee in pvt company. Hobbies is writing poems and history.

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My Articles

"जीवन की ठोकर" कोई न देखें मेरे अंदर कितने घावों से भरा हूँ कितनी तन्हाई है मेरे अंदर कितने गांठों से बंधा हूँ जीवन के ठोकरों ने अने read more >>
बैठा ऊँचे अचल में अचल के आँचल में | रज का बिछौना था पवन का हिलोरा था | धरा को निहारता गगन को निहारता | हरे भरे कानन थे जड़ जड़ पहन थे | ऐस� read more >>
आंखे अभी बंद हैं मेरी समझ में अभी ना आता घने अँधेरे में छिपा हूँ प्रकाश तो दिखा दे माता जन्म दिया है जो तुमने मुझे टोकरी में डाला कब read more >>
"सुमन इस धरा की " मैं सुमन इस धरा की खिलखिलाती हूँ मुस्कराती सबको मैं हँसाना सिखाती कष्टों को सहना सिखाती कठोर धुप में खिलखिलाती read more >>
संघर्षों से जीना सीखो दुखों को पीना सीखो | मुख पर मुस्कान लाना सीखो दुःख पर मरहम लगाना सीखो | आहत होना मत सीखो फतह करना तुम सीखो | आत� read more >>
" सपने में बचपन " तमस छाया था मन में उदासी छायी थी तन में चक्षु पटल झुके हुए यादों में खोये हुए खो गया सपनो में सपनो से अपन� read more >>
गंगे तेरा जल पावन शीतल करता है तन मन हिमालय की गोद से लिया है जन्म तुमने शैलपुत्री कहलाती हो प्राणियों की प्यास बुझती हो कल -कल करत� read more >>
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