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Sanam kumari Shivani
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Sanam kumari Shivani
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@ sanam-kumari-
, Bihar
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आहिस्ता चल मेरे जिन्दगी
आहिस्ता चल मेरे जिन्दगी अभी कई कर्ज चुकाना बाकी हैं। कुछ दुख मिटाना बाकी हैं कुछ फर्ज निभाना बाकी हैं। रफ्तार तेरे चलने से, मुझे लग
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आज तिरंगा फहराता है अपनी पूरे शान से
आज तिरंगा फहराती है अपनी पूरे शान से हमें मिली है आज़ादी वीर शाहिदो के बलिदान से, आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी,लाखों लोगों ने �
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सच्ची मोहब्बते
आज के ज़माने में ,सच्ची मोहब्बत करने वाले को और कुछ मिले या न मिले पर याद करने के लिए एक चेहरा जरूर मिल जाता हैं। नादान होता है यह दिल �
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कन्यादान
कन्यादान हुआ जब पूरा आया रस्म बिदाई का हँसी खुशी सब काम हुआ सारी रस्म अदाई का बेटी के उस कोमल स्वर ने बाबुल को झकझोर दिया पूछ रही थी प
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गजल
शर्मा जाता हैं शीशा, जब तुम सामने आती हो चांद भी घबराता है जब तुम जुल्फें गिराती हो, बड़ी ख़ूब सूरत कारीगरी है खुदा की, तुम मुझे बस इतन
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गज़ल
फर्जी मोहब्बत मिलती हैं बाजारों से, सच्ची मोहब्बत मिलती हैं मंजारो से, मन्नतो से मिलते हैं दो दिल , यहां मिल जाते हैं जिस्म हजारों से
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गज़ल
हमने ताजो तख्त को पलटते देखा है। और पत्थर को खुदा बनते देखा है। जीत मेरी तकदीर की मोहताज नहीं हमने समंदर को बारिश बनते देखा है। बस थ�
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दोस्ती
दोस्त वो है जो थाम के रखता हैं हाथ परवाह नहीं उसको कोन है तुम्हारे साथ उसकी आंखों में चमक दिखती हैं जब होती हैं हमारे साथ गुज़र जाता �
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दोस्ती
दोस्त वो है जो थाम के रखता हैं हाथ परवाह नहीं उसको कोन है तुम्हारे साथ उसकी आंखों में चमक दिखती हैं जब होती हैं हमारे साथ गुज़र जाता �
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मां
* जिसके होने से में ख़ुद को मुक्कमल मानती हूं में खुदा से पहले अपनी मां को जानती हूं। * मुझे माफ़ कर मेरे यां खुदा झुक कर करू ते
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