(गजल छंद01)
चलते चलते बोझिल होने पर ठहराव ही है जरूरी,
रहते रहते एक ही छत के नीचे बदलाव ही है जरूरी।
संसार में गम बहुत हैं इसलिए प्यार नि� read more >>
(मुक्तक छंद)
01
जिन्दगी को मैंने इस कदर देखा जिन्दगी मुझ में डूब गई।
मेरी हर चाहत को पूरा करने के लिए मजबूर हो गई।
अब आलम यह है कि सारी दु� read more >>