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Shivani singh
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Shivani singh
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@ shivani-singh
, Uttar pardesh
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प्रकृति के रंगों से खिलकर- दिलों को भी बहलाया है
उगते हुए बरगद के पेड़ को, हरियाली से सजाया है। प्रकृति के रंगों से खिलकर, दिलों को भी बहलाया है।। छाया देकर आश्रय उन्हें, धूप से तापम�
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बसंत ऋतु पर कविता-चमकती धूप रंगीन फूल
चमकती धूप, रंगीन फूल, गाती बहार, खुशियों का जूल। सरसों की खेतों में भोरी ठंडी हवाएं, मोह लेती हैं मन को, बसंत की मधुर लहराएं। फूलों की ब
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बुलबुले पानी पर कविता-चमकती धूप में खेलते जल बुलबुले
चमकती धूप में खेलते जल बुलबुले, छोटी सी तलवारों से उछलते दिल के खिलबुले। नदी की लहरें झूम कर आती हैं छलकती, पानी के ज़रिए बच्चों को अप�
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मधुमक्खी -सुन्दरता का आभूषण है नतमस्तक मधुमक्खी
कलियों के मधु से लब चूमती मधुमक्खी, पुष्पों का अधीन वो रंगीन संगी मधुमक्खी। समझना मुश्किल है उसका यार बनना, मिठास भरी बातों में बेबा�
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कण कण मे है भगवान -आत्मा उसकी ज्योति निर्मल
कण कण में है भगवान कण कण में है भगवान, आत्मा उसकी ज्योति निर्मल। सर्वत्र व्याप्त वही है, नहीं कहीं भी अभिमान।। पुण्य पाप की गिनती नही
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साहस -हमारे आंतरिक सबलता को प्रकट करता है
साहस पर विचार करते हुए, यह सत्य है कि साहस एक महत्वपूर्ण गुण है जो हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। स
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तारों के संग रात बिताते हैं-हम खुद को भूल जाते हैं
तारों पर गीत गाते हैं, उनकी चमक में खो जाते हैं। उनकी ज्योति से हम रंगीं हो जाते हैं, ख्वाबों को सजाते हैं। तारों के संग रात बिताते है�
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चाँदनी के तारे चमकते हैं-ख्वाबों को सजाते हैं
चाँद पर गीत गाते हैं, उसकी रौशनी में खो जाते हैं। उसकी मधुर सुंदरता पे हम दिलों को रोशनी मिल जाती है। चाँदनी के तारे चमकते हैं, ख्वाब�
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सपनों की दुनिया में उलझी रह जाती है
अबला नारी शक्तिहीन, अपराधीत और भयभीत, धीरे-धीरे संघर्षों में ही गुम हो जाती है। समाज की जालीम नज़रों से बच्ची, सपनों की दुनिया में उलझ�
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गहरी संध्या में उठा वीरान सा ध्वनि
विधवा की आवाज़ काली रात छाती पर आवाज़ लगी, विधवा ने निहारा और विचलित हो गई। गहरी संध्या में उठा वीरान सा ध्वनि, उसकी माटी से निकली कु�
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