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झिलमिलाते हुए दिन रात हमारे लेकर कौन आया है हथेली पे' सितारे लेकर हम उसे आँखों की देहरी नहीं चढ़ने देते नींद आती न अगर ख़्वाब तुम्हारे � read more >>
ढल गया दे के रोशनी सूरज कह गया बात इक नई सूरज एक्टिंग डूबने की करता है डूबता तो नहीं कभी सूरज शाम होते ही छोड़ जाता है रोज़ ऑंखों में कु� read more >>
इन ढालों के दुर्गम पथ पर देखे रोज़ फिसलते लोग फिर कैसे शिखरों पर पहुँचे बैसाखी पर चलते लोग प्यारी नदियों की आहों पर हृदय तुम्हारा पि� read more >>
इन ढालों के दुर्गम पथ पर देखे रोज़ फिसलते लोग फिर कैसे शिखरों पर पहुँचे बैसाखी पर चलते लोग प्यारी नदियों की आहों पर हृदय तुम्हारा पि� read more >>
इन ढालों के दुर्गम पथ पर देखे रोज़ फिसलते लोग फिर कैसे शिखरों पर पहुँचे बैसाखी पर चलते लोग प्यारी नदियों की आहों पर हृदय तुम्हारा पि� read more >>
इन ढालों के दुर्गम पथ पर देखे रोज़ फिसलते लोग फिर कैसे शिखरों पर पहुँचे बैसाखी पर चलते लोग प्यारी नदियों की आहों पर हृदय तुम्हारा पि� read more >>
न मेरा है न तेरा है ये हिन्दुस्तान सबका है नहीं समझी गई ये बात तो नुक़सान सबका है हज़ारों रास्ते खोजे गए उस तक पहुँचने के मगर पहुँचे हु� read more >>
आप कहने को बहुत ज़्यादा बड़े हैं असलियत यह है मचानों पर खड़े हैं ख़ास कंधा, दास चंदा, रास धंधा, एक अंधे दौर के सिर पर चढ़े हैं कीजिए झट कीजिए read more >>
ज़िन्दगी-सी यों ज़िन्दगी भी नहीं किन्तु मंजूर ख़ुदक़ुशी भी नहीं सिलसिलेवार मौत जीते हैं ज़िन्दगी की घड़ी टली भी नहीं दिल की दुनिया उजाड़ � read more >>
मंदिरों में आप मनचाहे भजन गाया करें मैक़दा ये है यहाँ तहज़ीब से आया करें रात की ये रौनक़ें अपने मुक़द्दर में नहीं शाम होते ही हम अपने घर च� read more >>
न जाने मन में उठते हैं क्यों? हजारों सवाल ! न जाने दिल क्यों? आज कह रहा है !कह दूं मैं भी कुछ अपने दिल का हाल! कहने को बहुत कुछ है! मगर जुब read more >>
न देखो पीर उर की, पर अधर की प्यास तो देखो निहारो मत दिये को, पर शलभ की लाश तो देखो न कहना फिर तड़प का कुछ असर होता नहीं जग में, धरा के ताप पर read more >>
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