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ग़ज़ल
ਗੋਪੀਆਂ ਹਜ਼ਾਰ ਸੰਗ ਰਾਸ ਲੀਲ੍ਹਾ ਖੇਡ ਕੇ,
ਗ਼ਜ਼ਲ ਗੋਪੀਆਂ ਹਜ਼ਾਰ ਸੰਗ ਰਾਸ ਲੀਲ੍ਹਾ ਖੇਡ ਕੇ, ਰਾਧਾ ਵਾਜੋਂ ਕੁੰਜ ਬਿਹਾਰੀ ਕੱਲਾ ਰਹਿ ਗਿਆ | ਛੱਡ ਬਾਲ ਸਕੇ ਬ੍ਰਿਦਾਬਨ ਤੇ ਸੁਦਾਮੇ ਨੂੰ, ਤਖ਼ਤ ਤੇ ਬ�
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ਬੜਾ ਕੁੱਝ ਹੋਰ ਵੀ ਸਾਮਾਨ ਚੋਰੀ ਹੋ ਗਿਆ
ਬੜਾ ਕੁੱਝ ਹੋਰ ਵੀ ਸਾਮਾਨ ਚੋਰੀ ਹੋ ਗਿਆ ਮੰਦਰ ਚੋਂ ਯਾਰੋਂ ਭਗਵਾਨ ਚੋਰੀ ਹੋ ਗਿਆ ਸੀ.ਸੀ. ਟੀ. ਵੀ ਕੈਮਰੇ ਵੀ ਬਹੁਤ ਲਾਏ ਹੋਏ ਸੀ ਪਰ ਇਹ ਤਾਂ ਬੜਾ ਹੀ ਅਸਾਨ ਚੋਰੀ ਹੋ ਗਿ�
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रुपया क्यों सस्ता है अब भी दिनार से
हल्की फुल्की पतली सी एक दरार से ताकता रहता हूँ दुनियाँ को इस पार से दरिया बहाकर ले जाता है अपने साथ कट कर गिरती है जो मिट्टी किनार से
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कच्चा रास्ता थोड़ी बूंदों से बिगड़ जाता है।
कच्चा रास्ता थोड़ी बूंदों से बिगड़ जाता है। घना बादल पवन से बिखर जाता है। दिल कोई पत्थर की जागीर नहीं, जब टूटता है शीशे की तरह बिखर जात
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जिंदगी का सफर
कभी भीड़ में कभी तन्हाइयों में कटेगी यह जिंदगी है यारों हर दिन एक पल घटती ही रहेगी कुछ पाने की चाहत है कुछ खोने का डर है दिल में बस हर व�
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प्यार भरी कहानीयाँ
नितिन जो जीया से लव करता हैं। जीया और नितिन दोनो शादी में जाते है वहा पे रमेश मिलता है जो जीया की फ्रेंड का भाई होता हैं! रमेश जीया से फ़�
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खजाना
खजाना मेरे ख्वाबों में है, जिसमे भरी है दुनिया के तमाम रत्न। रत्नों में तुम सबसे अलग हो, आई हो तुम फलक से। फलक पर तेरा घड़ है, उतरी जमीं
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मोबाइल
📱📱!! मोबाइल !!📱📱 अब तेरा ही सहारा हैं तू ही दोस्त अब तू ही सहारा है मतलबी दुनिया में बस एक तू ही चाबी और ताला हैं अकेला नही हैं हम मेरे �
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हम आदिवासी जंगल को खूब समझते है
तेरे पैंतरे को तेरे दंगल को खूब समझते हैं हम आदिवासी जंगल को खूब समझते हैं हाकिम हमें ग्रहों की चाल मे मत उलझा हम,सूरज,चांद,मंगल को खू�
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दगडाचा देव
आमचा देव दगडाचा नाही, आम्ही दगडात देव पाहणारी माणसं आहोत....
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समझा पाया...
ना वह समझे.... ना मैं कुछ उन्हें....समझा पाया... वह गिरे शक की खाई में जाकर ऐसे कि ना....मैं.....उन्हें उठा पाया.... बिखरते रहे ईट पर ईट शब्दों के फ�
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उजाले लापता हैं और कोई गवाह नही है
बियाबान है जंगल यहाँ कोई सदा नही है दम सा घुटता है अब कहीं भी हवा नही है खमोशी से आकर छा गए सब और अंधेरे उजाले लापता हैं और कोई गवाह नही
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