दीपावली के अवसर पर बनवारीलाल अपने घर के ड्राईंग रूम को सजाते हुए सोच रहा था, ‘‘क्या है उसके पास? न ढंग के सोफे, न अच्छी कुर्सियां, न आल read more >>
अगर कोई इंसान असमर्थ है या वो किसी कारण वश असहाय है उस पर भारी संकट आया है वो कहीं काम करने नहीं जाता है ना ही वो किसी कि मदद करता है और उस read more >>
समीरा अपने बैग को संभालते हुए बहुत ही तेज़ी से बस स्टॉप की तरफ आगे बढ़ रही थी ,कुछ देर बाद वह बस स्टॉप पर पहुंच जाती और बेसब्री से बस का इ� read more >>
निजी बस में कंडक्टर टिकिट काटता हुआ एक वृद्ध के करीब पहुंचा, ‘‘कहां जाना है, ‘बा’?’’
‘‘माधोपुर’’ बेतकल्लुफी से जवाब मि� read more >>
‘कैसी लगी, लड़की?’ लड़की के घर से निकलकर बिचौलिये ने राजू से प्रश्न किया।
राजू को लड़की कुछ जमी; कुछ नहीं। वह फैसला नहीं कर पा रहा था कि read more >>
एक महिला एक बच्चे को गोद में लेकर मोहन के घर पहुंची और अपने जार-जार हो चुके ब्लाउज को साड़ी के आंचल में छुपाते हुए बोली, ‘‘हुजूर, काम क� read more >>