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कविताएँ
बचपन-कितने खुबसूरत हुआ करते थे बचपन के वो दिन
कितने खुबसूरत हुआ करते थे बचपन के वो दिन, सिर्फ दो उंगलिया जुड़ने से, दोस्ती फिर से शुरु हो जाया करती थी...
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मोबाइल-मोबाइल देखते देखते हम सबको भूल जाते
उदासी ही उदासी , छायी है हर पलो में । कोई टहलने को ही नहीं निकलता , व्यस्त हे सब मोबाइलो में । बचपन �
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विराज रहै है अवध बिहारी
सब ग्रह नक्षत्र मिल , योग बनावत है। शुभ , पगु धार रहे ,प्रभु रघुनाथ जी शुभ । है तारारण हार प्रभु , जय श्री राम प्रभु तार दियो प्र�
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नूतन साल खुशियां भरे
नूतन साल खुशियां भरे,लाए मधुर बहार। जीवन सुरभित खूब हो, दिल में हो अति प्यार।। दिल में हो अति प्यार,चाह पूरी हो सबका। सबमें झलके जोश,क�
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अच्छा करना सोच है-मन में है तूफान
अच्छा करना सोच है,मन में है तूफान। विपदा का कर सामना,फलप्रद किया जुबान।। मन में है तूफान रब, दे दे दृढ़ वरदान। खुशियां भरूं समाज में, �
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जब तक मुझ में सांस है
जब तक, मुझमें सांस है, मुझे ये विश्वास है। मैं सफल जरूर, हो जाऊंगी, गर मेहनत करती, जाऊंगी। कुछ मिले न मिले अगर, एक सुकून तो अवश्य मिलेगा,
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स्पर्धा का दौर है-मन को रखें बुलंद
स्पर्धा का दौर है,मन को रखें बुलंद। रखिए ऊंच विचार को, हों शीतल सम चंद।। स्पर्धा का दौर है, रखें साथ उत्साह। कम हों कभी न चाह नव,लगे सु�
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सुख दुख हैं मेहमान जी
सुख दुख हैं मेहमान जी,स्वागत करना काम। दो ही पहलू सत्य है,कभी सुबह तो शाम।। सुख दुख हैं मेहमान जी, सही सिखाते मर्म। सुख में भी प्रभु मै
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जलने लगे अलाव अब ठंढ़ी चारों और
जलने लगे अलाव अब,ठंढ़ी चारों और। थड़थड़ हैं तन कांपते, नहीं बंधते कौर।। जलने लगे अलाव अब,अमृत तुल्य है आग। बिना आग के जल नहीं,गाते सब य
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इच्छाएं बेअंत है-काबू में रख यार
इच्छाएं बेअंत है,काबू में रख यार। बेहिसाब रख प्यार को, सुख मय हो परिवार।। इच्छाएं बेअंत है, परम् जरूरी आप। मैं चाहूं जग का भला, करूं मं
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सदा फर्ज पालन करें-मिलता दिल से मान
सदा फर्ज पालन करें,मिलता दिल से मान। और मिले सबसे दुआ,घटता कभी न शान।। जीना मत अपमान सह, ओ मेरे प्रिय यार। ऐसों को हम दें सजा,मित्रों क�
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जिंदगी क्या होती है
मौत के पहलू में आकर जाना जिंदगी क्या होती है जिससे मुंह मोड़ रहे थें हम वही जीने का वजह होती है मैं जानती हूं तूने रुलाया बहुत है पर �
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