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अपने को जो मानते-करता दृढ़ किरदार
#विधा:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अपने को जो मानते,लगते हैं दिलदार। ऐसा दिल अब है लगा,करता दृढ़ किरदार। ऐसे दृढ़ किरदा�
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माया जोड़ी रात दिन-सबल किया परिवार को
#विधा:- मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" माया जोड़ी रात दिन,लिया बहुत ही दर्द। सबल किया परिवार को,बना रहा दृढ़ मर्द। हँसकर आगे को
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जलता दीपक आस का-हृदय चाहता खास
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जलता दीपक आस का,हृदय चाहता खास। लब से निकले प्रेम ही,मिटे सभी की प्यास। सफल भव्य किरदार स
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प्रेमश्वर की भक्ति में-जीवन करें निसार
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" प्रेमश्वर की भक्ति में,जीवन करें निसार। जीवन होगा तब सफल,सुखी रहे परिवार। चले वंश तब वृ�
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औजार-जिसके सहारे बना दूं कोई नवीन किस्सा
औजार को भी बना लूं अपना हिस्सा, जिसके सहारे बना दूं कोई नवीन किस्सा। जिसे सुनकर लोगों में खूब जोश जगे, फिर हर मुश्किल आसान ही आसान लगे।
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काटे कटी न रात अब-आँखों में है नूर
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" काटे कटी न रात अब,आँखों में है नूर। कदमों में है जोश अति,खुद पे करूं गुरूर। परचम अपना ही उ�
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तेरी क्या औकात है-पहने हुए नकाब
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" तेरी क्या औकात है,पहने हुए नकाब। बातें भी बेकार है,रखता नहीं जवाब। मैं तो हूं अब शेर दृढ�
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जीना है तो सीख ले-श्रम करना ओ यार
विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जीना है तो सीख ले,श्रम करना ओ यार। मिले मेहनत से खुशी,छोड़ो मत अधिकार। करें यहां निर्माण,�
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उजला तन किस काम का-काला जब हो सोच
#विधा:-दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" उजला तन किस काम का,काला जब हो सोच। ऐसे जन सब ही यहाँ,करते रहते नोच।। उजला तन किस काम का,जिसक
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रहस्य-दिव्य सुन्दरी जिसे देखते ही खुशी होता था
उसका आना और जाना मेरे लिए कौतूहक था, दिव्य सुन्दरी जिसे देखते ही खुशी होता था। बहुत ही रहस्यमय लग रही थी वो, पूरी शरीर में एक मादकता भर
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रात का दर्पण-चंचल चांदनी है जगमगाते तारें
चंचल _चांदनी है,जगमगाते तारें , महकी रात है। आंखों में आनंद की रौशनी है, लब पर मधुर गीत के बोल हैं। सफ़ेद आसमान यूं देख रहें हैं, जैसे उ�
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क्या कहूं आज मैं आप से-डरता मैं हूं बहुत पाप से
(मुक्तक छंद) क्या कहूं आज मैं आप से। डरता मैं हूं बहुत पाप से। मैं प्यार का एक मस्त राही- डरूं नहीं कद की नाप से । (स्वरचित मौलिक) संद�
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