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कविता = ( कोख ) कोख में अपनी माँ मेरी हमको देती मार ! नारी नर्क से निकाल के हमको कर देती उद्धार !! श्राप ग्रस्त इस योनि से हमको देती तार ! हम read more >>
तुम्हारा पत्र... अक्सर मुझे यादों की तरफ खींचती है। जी हां, बहुत ही पुरानी यादें। जो हमारी मोहब्बत से जुड़ी हुई है। तुम्हारा पत्र... जि� read more >>
मैं हूँ घड़ी आलापन घड़ी ट्रिन- ट्रिन - ट्रिन - ट्रिन.... बजती हूँ। प्रातःकाले सभी जनो को मैं ही उठाया करती हूं। उठ जाओ - उठ जाओ भानू! अपनी � read more >>
विरह वार में जलते जलते मैंने जीना सीख लिया । सपनों की कलियां ना टूटी नहीं मिला मन चंदन अरण्य बना जीवन धन छूट गया मन आंगन कहीं प्रभात न read more >>
किसी का वक्त ही सहारा होता हैं। तो कोई वक्त का ही मारा होता हैं। दुखों के शहर में खुशी का एक आशियाना होता हैं। कितनी भी इमारतें हो दुन� read more >>
झूठी है यह दुनिया सारी, यहां कोई ना समझे पीर-पराई। मतलब से बढ़कर कुछ नहीं यहां, न इंसान, न भगवान। मतलब से सब प्यार, मतलब से सब यार। मत� read more >>
हरी भरी प्रकृति, छाई हरियाली , बागों में फूल खिले हैं, कलिया मुस्कुराई, टप टप टपकी बूंदें, पत्ते पत्ते पर हरषाई, तितली फूलों पर मंडराई, read more >>
(दोहा छंद) राजनीति में धर्म का,भारी अभी अभाव। लाठी के बल भैंस है,फैली अजब दुराव।। राजनीति में धर्म अब,भारत में है झूठ। कथनी करनी सम नह� read more >>
(दोहा छंद) जीवन के दस्तूर है,सुख दुख का यह मेल। यहां खुशी तो गम वहां,रखें नियम सम जेल।। कोई राजा है यहां,कोई रहे गरीब। जीवन के दस्तूर ह� read more >>
(दोहा छंद) मीरा जैसी प्रीत जब,करे जगत के लोग। घर घर में खुशियाँ रहे,होगा कभी न रोग।। अमर कहानी भक्ति की,जाने घर घर आज। मीरा जैसी प्रीत प read more >>
(दोहा छंद) मिले न ज्यादा भाग्य से,इसका रखें विचार। आगे जो है भाग्य से,ऐसा यह संसार।। मिले न ज्यादा भाग्य से,सबका यहां नसीब। जिसकी जैसी read more >>
(दोहा छंद) आँखों में चाहत बढ़ी,आए भव्य विचार। शहरी रौनक देखकर,हृदय हुआ अति गुलजार।। शहरी रौनक देखकर,कंगन खनकी कान। तन मन मुग्ध सितार � read more >>
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