कविता = ( कोख )
कोख में अपनी माँ मेरी हमको देती मार !
नारी नर्क से निकाल के हमको कर देती उद्धार !!
श्राप ग्रस्त इस योनि से हमको देती तार !
हम read more >>
मैं हूँ घड़ी आलापन घड़ी
ट्रिन- ट्रिन - ट्रिन - ट्रिन....
बजती हूँ।
प्रातःकाले सभी जनो को
मैं ही उठाया करती हूं।
उठ जाओ - उठ जाओ भानू!
अपनी � read more >>