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अटखेली बाला करे-गाती दिलकश गीत
(दोहा छंद) अटखेली बाला करे,गाती दिलकश गीत। देती है अदभुत खुशी,लगे रम्य संगीत।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(दे�
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अटखेली में डूबकर- मैंने देखा खूब
(दोहा छंद) अटखेली में डूब कर, मैंने देखा खूब। भागे तब दुखड़ा सभी,लगूं भव्य महबूब।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(
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चाहत कभी न यूं मरे-जिन्दा दिल हर पल रहें
(कुंडलिया छंद) चाहत कभी न यूं मरे, बड़े स्वप्न को देख। जिन्दा दिल हर पल रहें, प्राण बने नव लेख।। प्राण बने नव लेख,जिसे पढ़कर सब सीखे। और
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मानवता ही धर्म है-प्यार सदा अनमोल
(कुंडलिया छंद) मानवता ही धर्म है,प्यार सदा अनमोल। करे कर्म से याद जग,मीठे रखते बोल।। मीठे रखते बोल,रहे सबसे वह आगे। बनते दिव्य मिशाल,स
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मनोदशा मजदूर की-दृढ़ उसमें है जोश
(दोहा छंद) मनोदशा मजदूर की,दृढ़ उसमें है जोश। साहस रखता खूब है,हरदम रखता होश।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देव�
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बरसात की एक रात- मेरे दिल में अंकित है
बरसात की एक रात मेरे दिल में अंकित है, और शायद जीवन भर भी अंकित ही रहे। अमावस्या की काली रात और खूब बारिश, आधी रात से भी ज्यादा का वक्त र�
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जीवन में कभी हार ना मानना-थककर नहीं बैठना हैं
जीवन में कभी हार मत मानना, थककर नहीं बैठना हैं, होगी कुछ कोशिश बेकार, फिर भी कोशिश करते रहना हैं, चलना है हर राह पर, चट्टानों में भी घ
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छमाछम बारिश आ रही है-हरियाली ही हरियाली छा रही है
छमाछम बारिश आ रही है, हरियाली ही हरियाली छा रही है। सारे जीव आनन्द ले रहें हैं, नजारा बहुत ही अद्भुत लग रहा है। मानो एक नवीन सृजन हो रह�
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विश्व जगत की समृद्धि और विकास
धरती के अनंत शोभित गगन, जगमगाती चांदनी और तारों का जहां। प्रकृति का नजारा अनूठा, सौंदर्य से परिपूर्ण यह भगवान। पहाड़ों की ऊँचाइयों �
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काले बादल छाए हैं आसमान में
काले बादल छाए हैं आसमान में, आँधी चली, तूफान आये हैं जहां में। धरती बिखरी हुई है रंगीन चादर से, सब जगह छाई हुई है अंधकार घने से। काले बा
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काले बादल छाए हैं आसमान में
काले बादल छाए हैं आसमान में, आँधी चली, तूफान आये हैं जहां में। धरती बिखरी हुई है रंगीन चादर से, सब जगह छाई हुई है अंधकार घने से। काले बा
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बिना दीप के जलना चाहूं
बिना दीप के जलना चाहूं। बिना साथ के लड़ना चाहूं। रातें हैं बेजान मगर बिना रात के रहना चाहूं। खुशियों की भरमार बहुत है फूल हमारे पास
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