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कविताएँ
बेमुरब्बत ना समझे ये हमको जमाना
जी चाहता है कि तुम्हे प्यार कर लूं, मुहब्बत की बातें मैं दो चार कर लूं। बेमुरब्बत ना समझे ये हमको जमाना, अब तुमसे मुहब्बत का इकरार कर ल�
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ये जीवन तेरा ही तो है
ये जो जीवन चलता है तेरे ही खातिर तो है दिल मे धक धक होता है तेरे ही खातिर तो है दूर जो होता है तू तो बेजान वो रातें लगती हैं पास भी जब भ
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दुनिया की जंजीर पड़ी है
दुनिया की जंजीर पड़ी है बांध सको तो बांध लो मुझको डर कर नही खड़ा हूं रण में शत्रु का संज्ञान है मुझको इस भय से क्या पीछे हटकर अपनी का�
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कहो धरती पे इसे लाते हैं
हंस हंस कर लोग जलाते हैं, धूप में रोशनी दिखाते हैं। आकाश अपना, उसका रंग अपना, कहो धरती पे इसे लाते हैं। सुधा चौधरी बस्ती
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प्यार छुपा के रखा-दुनिया से छुपा के रखा
प्यार छुपा रखा- तुझे कैसे समझाऊं, दुनिया से छुपा के रखा.. यह चिराग़ से रौशन होगी,, रौशनी के लिए- दर्द-ए-सितम से गुज़र जाऊंगा..!! -मोती
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फ़िक्र कल में बसा संसार
गुज़रे कल- को रोते तमाम, फ़िक्र कल में बसा संसार सो बिरला जान- जो पूर्णत: आज में जीता उसके- दो दिन परमानंद में कटते -मोती
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भूख निगले जा रहा है
भूख निगले जा रहा है! आंखों से दृष्टि गई- जुबान से आवाज भी गई सब मिट गए रिश्ते-नाते,, अब मज़हब- देश-दुनिया तक याद नहीं भूख निगले जा रहा �
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बिहार हु मैं-चंदर्गुप्त मौर्य का बिहार हु
मैं बिहार हूँ। चंदर्गुप्त मौर्य का बिहार हु। चानक्या का बिहार हु। राजेन्द्र प्रसाद और बिर, कुअर सिंह का बिहार हु। दुसरो ने कभी जान
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ओ पालनहारे-मुझे इतनी शक्ति देना
ओ पालनहारे...। मुझे इतनी शक्ति देना, अंधेरे में जब भटकूँ, मेरी उंगली थाम लेना। हो सदैव उजाला मेरी जीवन में, इतनी ज्योति जला देना। ओ पाल�
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सिर्फ़ तुम-तुम सिर्फ़ जा नहीं रही हो
तुम जा रही हो ये तुम भी जानती हो और मैं भी पर एक बात सिर्फ़ मुझे ज्ञात है जो यह है कि तुम सिर्फ़ जा नहीं रही हो बल्कि जा रही हो छोड़ कर मु
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देख सम्भल कर भईया चलना
देख सम्भल कर भईया चलना नेता है लतखोर यहां तन के कपड़े भी बिक जाये नेता के पास जो जाये देश बेच वो बने बलवान बोले नेता देश की शान ऐसे ने�
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विकसित हुआ देश ना बदली सोच-पर ना बदली सोच आज भी क्यों
भेद भाव से जकड़ी दुनिया , आज भी क्यों । विकसित हुआ देश , पर ना बदली सोच आज भी क्यों। क्यूँ लड़को को उच्च शिक्षा, और लड़की को शिक्षा क�
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