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कविताएँ
खुद से बात.......
हां माना औरत हूं मै समाज की बेड़ियों से बंधी नायाब शौहरत हुं,मैं तो चलो एक मुलाकात ख़ुद के साथ हो जाए, एक कोशिश ज़माने के साथ हो जाए पर उल
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बड्डे पर कविता
कविता -बड्डे पर कविता प्यारी मैम हमारी हो कॉलेज की उजियारी हो नन्हे-मुन्ने हम फूलों की मैंम आप फुलवारी हो। तुम बच्चों में बच्चे ह
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बुढ़ापे की रोटी
कविता -बुढ़ापे की रोटी किसके चाह में भटकते हो राह में अपनो से अलग करते औलाद को बिना उम्र के बस्ते के बोझ को लाद देते हो बिना किसी सों
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वर्षा सुंदरी
कविता -वर्षा सुंदरी खुशियों से मन, झूम उठा मेरा देख उमड़ते,बादल का घेरा भीगूंगी मैं,वर्षा फुहार में डूबूंगी तब, प्रेम से प्�
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प्रकृति ही परिवर्तन है
कविता -प्रकृति ही परिवर्तन है प्रकृति ही परिवर्तन है परिवर्तन धरती अम्बर है सुख से पहले दुःख का आना राई का पर्वत बन जाना नन्ही कलिय
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सपनें
कविता -सपने सपने बुन लो गुन लो धुन लो खुद ही चुन लो सपने बुन लो। सारे सपने होते अपने सोंच समझ कर दिल की सुन लो। गुन लो धुन लो सपने ब�
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बोलने से पूर्व प्यारे,बोल का तू तोल कर ले
कविता - बोलने से पूर्व प्यारे, बोल का तू तोल कर ले। देख लो कोयल की कूक टेरती है बोल न्यारी काग सी काली भले है ,है मनोहर बोल प्य�
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राम संग कर प्रीत तूं सदा रहें उदगार
सबके दाता राम हैं, हृदय बसा लें राम। सब प्रभु ही सम्हाल दें, करें सरल हर काम। सबके दाता राम हैं,रहें खुशी में यार। गम को हम तूं मार दें,ह
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मुलाकात परी से
एक रात की बात है, सोया मैं था, अचानक सामने कुछ आभास हुआ। चौंक कर मैं उठ बैठा, सामने देखा, एक खूबसूरत बला की सुन्दरी खड़ी है। मैं हर्षित
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कल्पना की दुनिया
कल्पना की दुनिया को साकार करना है, अपने सपने को हर हाल में सच करना है। देखूं स्वपन रजनी की आगोश में, प्रातः उठते ठगा सा रह जाता हूं। प�
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शोभाश्री
दिन है सर्दी का कोहरा छाया है। सरसों के सुमन पर रजत बिखरी पड़ी। भानु निकल रहा कि कोकिला चल पड़े भृग भाग रहे सरसों के सुमन पर क्या पत
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मधुमास का मौसम
था मधुमास का मौसम पढ़ा था उल्टा अम्बर न जाने थी थाल भरी मोतियों से आंगन में फैले दूध के झाग आकाश था या आंगन विभावरी थी चांदनी उजास था �
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