पेड़ों का जीवन जैसे
मानव का जीवन ‌।
जब पेड़ों से पते
गिरने लगते हैं, तो
वह धिरे-धिरे अपने
वृद्धा अवस्था में
आने लगता है ।
और उनकी मृत� read more >>
बेटी अपनी मां से कहती है.... ये दिखवा क्यूं मां मेरे साथ माँ? मुझे घर की लक्ष्मी कहते हैं, देवी कहते हैं ना जाने क्या-क्या कहते हैं फिर मुझे read more >>
ये बात समझ में आई नहीं ओर किसी ने समझा नहीं कैसे करूं मन की बात ये सा कोई ही नहीं जो मान में बात थी वी मान में ही रह गई जो दिल में बात थी वो � read more >>
# जिन्दगी .....
मध्यमवर्गीय जिंदगी ,
कर्जदारों की बंदगी
बंट गई है किश्तों में ,
आगे और कुछ नहीं ......!
चिन्ता नेताम " मन "
नगर पंचायत डों� read more >>
मंदिर में मूरत किस काम की है जब किसी के घर में रोटी ना शाम की है दिल दुखी है मन उदास है फिर पूजा किस काम की कोई रो रहारा मंदिर के बहार फिर � read more >>
हरी घास की गोब सी लहलाती हुई जो तुम आती हो,
हवा के झोंकों सी कुम्हलाकर, अचानक जो मुझे छू जाती हो
साँसे थामे रखता हूँ मैं, फिर भी मदमस्त क� read more >>