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अकेलेपन ने मुझे रुलाया है। पर रुलाते रुलाते बहुत कुछ सिखाया है। अकेलेपन ने मुझे रास्ते में भटकाया है, लेकिन राहगिरो को पहचानना भी � read more >>
अकेलेपन ने मुझे रुलाया है। पर रुलाते रुलाते बहुत कुछ सिखाया है। अकेलेपन ने मुझे रास्ते में भटकाया है, लेकिन राहगिरो को पहचानना भी � read more >>
कविता -मकसद ज्ञान मंजिल तक पहुंचाता है पर मंजिल का पता हो ध्यान मकसद तक ले जाता है अगर ध्यान मकसद पर डटा हो चूर चूर हो जाते हैं सारे � read more >>
शिक्षक वो है जो हर परिस्थिति में देता है ज्ञान समान विद्यार्थी, समान ज्ञान देता है , संविधान तो क्यों मारा उस बालक को जिसने पानी पीया घ read more >>
कर्म से बदले तक़दीर। जैसे उड़ते बादल की, बदले राह समीर। कर्महीन नर का जग में, जीना है बेकार। अलि अलविदा कहेंगे, जब हो कंटीली बार। रात read more >>
नींद और मैं मेले में छूट जायें किसी बच्चें से ऊंगली जैसे नींद हर रात मुझे ऐसे छोड जाती हैं read more >>
तुम जो आए तो बहार आया है रात को चैन और दिल को शुकून आया है तुमसे मिलने की तलप जो मुझमें है वो हद से ज्यादा अब दिल में आया है धन्यवाद read more >>
उनकी वफा का दामन इतना उमर रहा, हर मेहफिल मे हमारी मोहाब्बत का खबर चल रहा है करके मोहाब्बत उनसे हमतो , अपनी खुशनसीबी से इतरा रहे है अपने read more >>
कविता- यदुवंशम: योगेश्वर श्रीकृष्ण हे! द्वारकाधीश जन्मदिन की आपको बधाई आनंद,मंगल है पूरे जगत में झूम रहे अनुयायी निकाल कर रैली बन गो� read more >>
आते..जाते..राहों में मैं अक्सर..देखता हूं भीड़ का एक..मेला..! और नज़र आता है.. हर..एक शख़्स...अकेला..!! जिनके आंखों में.... चमकती रहती है...तनहाई read more >>
क्या कसूर था उस ननी जान छीन लिया सब कुछ...... बडा दि उस लाचार की ओर नौ महीने की प्रसव पीड़ा क्या कसूर था उस ननी जान नहीं जानता वह क्या धर्म.. read more >>
आभुष्ण, आभुष्ण, आभुष्ण, है धरा का पुजन,आभुष्ण,भुष्ण! हां! सन, सन्न, सन्न, सन, सन्नननन, रत्नों से धरा चेहकत्ती है!! जहां रत्न धरा read more >>
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