कविता -ख्वाइश
सुख जैसे कुछ
पाने की
दुःख जैसे कुछ
खोने की
कुछ खाने कुछ
पीने की
जग में जीवन
जीने की
"ख्वाइश"है।
नभ में खग सा
उड़ने read more >>
मेरे हृदय में तुम हो -
पर मेरे प्रेम से अलक्षित तुम हो ,
तारों से झिलमिलाता आसमान ;
अंग - अंग में तेरी प्रेम का पहन - वसन -
मुस्कान तेरी चाँ� read more >>
मैं क्या गई आपको छोड़ के
आपने तो मुझे क्या ,मेरी
यादों को भी कहीं दूर दफना दिए
सोची थी ,कुछ देर की बात है
हम संभल जाएंगे
पर क्या पता था क� read more >>
तुमने मुझे..खो दिया...
ठीक वैसे ही..जैसे 'बसंत' में
'पेड़'..खो देता हैं 'पत्तों' का साथ...
या वैसे..जैसे रह जाता है..
एक 'बूंद' तन्हा...'शाखों' पर
'ब� read more >>