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धरा धरी वीरों कि गती से, है दृश्य चेतना चंचल सी! कंचन है जगत के कथित कथा , और पावन जग के कर्म सभी!! चलती है हवा ले कर जगती का, read more >>
कर लाख कोशिशें शिद्दत कि, मुद्दत से पाए राह किरण! वशुधा-अम्बर का अचल साथ, दे रही किरण इस वशुधा पर!! पर किरण न कोई पंख रखे, read more >>
चलों तो राह हर वक्त नयी, क्या धरा पड़ा दोहराने मे! चलकर गिरना गिरकर चलना, है धरा पड़ा नज़राने मे!! खाकर ठोकर गिरता है मनुज, read more >>
कहता अभिनन्दन कर अभीवादन, ज़रा तम अधरों को दिप्त करुं! भरकर उजियारा अंधकार मे, धरा को ज्ञान से लिप्त करूं!! धरती कि शख्तियां read more >>
गर लाख कोशिशें हो शिद्दत कि, तब मिलतें हैं दो चार नज़र! चलतें ही रहें कर ध्यान मग्न, मंज़ील के राह कि डगर- डगर!! कभी व्यस्त मिलें read more >>
व्यथा को बनाकर दिप्त दिप्त, हर राहों मे युहीं चले चलो! चाहत को दबाकर हृदय मे, विश्व को तुम धारण कर लो!! व्यथा चाहत का अमर कुंज, read more >>
खूबसूरत एहसास है दोस्ती नए रिश्ते का पैगाम है दोस्ती अपनों से ज्यादा अपनापन निभाती है दोस्ती कभी हंसती तो कभी रूठ जाती है त किसी उम्� read more >>
दिमाग़ ही लगाते रहोगे, तो जीवन कब जीओगे? अच्छा हो गया, तो कैसे हुआ सोचते हो। बुरा हुआ तो, ईश्वर को कोसते हो। वक़्त ठीक हो, तो और ज़्यादा भ� read more >>
हिन्द लीख रहा कर्म शुद्धा का, संघर्षों कि कथा को मान दिया! अमर पवन, जलधार, तरू - तट, धरा को पावन धाम किया!! कभी मिली अमर रस महा हिन् read more >>
है विजय धरा कि नाज़ कलम, हर कमजोरों कि आवाज़ कलम! कलम दिप्त अरूणाचल पे, नभ पे उज्जवल धरातल से!! समय कि गाथा को लीख - लीख कर, भ� read more >>
युं तो हस्ती हैं जहां, मुस्कुराहट नाम कि! अधरों मे हलचल नम हुई, दास्ताने चाह की!! अविचल धरा कि चल जो ईच्छा, अज़र और अविचल धरा, read more >>
अगर मुझे उसका प्यार मिला होता...! उसकी चलने की थाप , पायल की झनक होती उसकी हंसने की अदा , चूड़ी की खनक होती उसकी नजरों की गहराई , मचलता सा read more >>
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