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होली
क्यारी में, फुलवारी में, हंसती है फाग जवानी। झूमे मंजरी संग तितली, फाग की अगवानी। बौराए, मधुमास में, भौंरा-भौंरी सारंग। प्यार पुराने ज�
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व्यापारी किसान हैं
रोटियां खिलाने वाले खुद भूखे सो रहे अन्न उगाने वाले को हैं दीमक खा रहे जो किसान हैं वो अब किसान लगते नहीं वड़े वड़े व्यापारी किसान ब
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भरम वाला निशाचर
भरम वाला निशाचर डराने लगा है सपने में भी भयभीत करने लगा हैं रोज़ रोज़ नए नए तरह तरह के वादे खौफ ज्यादा दिखाने लगा हैं कुर्सी की नीत�
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मतदान का दिन
मतदान हो रहा था, वोटर सब खड़े थे। बगुले सा मग्न हो, नेतागण अड़े थे । सड़कों पर भीड़ थी, सब लोग खड़े थे, फुसुर फुसुर बाते, बातों से बड़े �
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प्रभात काल का नमन नमस्ते
करती हैं किलकोरें कलियां, महक रही हैं गलियां -गलियां , मचा रहे हैं शोर पेड़ पर, खगकुल हंसते- हंसते । प्रभात काल का नमन नमस्ते।। पूरब का �
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कोई लौटा दे वो दिन
कोई लौटा दे वो दिन , जिसमें खेला था मेरा बचपन।। चू -चू कर चिड़िया आती थी, बिखरे दाने चुन -चुन आंगन से खाती थी। मैं दौड़ कर उन्हें पकड़ा कर
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वाकी है
बहुत वाकी है पाने को एक अलग जाहा वनाने को अभी तो शुरुआत है सफर की मंजिल के आखरी पड़ाव वाकी है वाकी हैं अभी आशमा झुकाने को कुछ समस्या
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चुनाव का दिन
मतदान हो रहा था, वोटर सब खड़े थे। बगुले सा मग्न हो, नेतागण अड़े थे । सड़कों पर भीड़ थी, सब लोग खड़े थे, फुसुर फुसुर बाते, बातों से बड़े �
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आपकी यादें
आपका जिक्र आपकी यादें ही काफी है जिंदगी जीने के लिए यही उम्मीद ही काफी है जब भी कहीं मुलाकात हो मिलकर मुस्कुरा दीजिए जिंदगी जीने के
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मैं अपनी क़लम की स्याही से तेरी मोहब्बत के निशान छिपा दूँ !
मैं अपनी क़लम की स्याही से तेरी मोहब्बत के निशान छिपा दूँ ! तुम कभी पूछो तों चन्द शब्दों में अपने दिल के हाल बता दूँ याद आते हैं वे ख़ूब�
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तेरी कसम तेरी बहुत याद आती है
तू कैसे जीती होगी मुझे तो बड़ा तड़पाती है। रुकती नहीं है तेरी, तेरी कसम तेरी बहुत याद आती है।। दिन के उजाले तो गुजर जाते हैं आखिर, रात क�
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भूल जाओ
भूल गए हैं अतीत को हम जैसे भूल जाते हैं जैसे हर दिन रात को हम दर्द देता है अतीत के पन्नों को फिर से पढ़ने मे न जाने फिर क्यों डर लगने लगत�
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