है बेबसी में लिपटी, मेरी ये जिंदगी है ।
आंखों में अश्रुजल फिर भी, होठों पे मेरे हंसी है।।
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अंधेरों read more >>
ऐ जीवन के थके मुसाफिर,
बढ़ चल मंजिल अब दूर नहीं ।
कर्म करे फल ना पाये,
ये प्रकृति का दस्तूर नहीं ॥
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ऐ जीवन के थके मुसाफिर,
बढ़ चल मंजिल अब दूर नहीं ।
कर्म करे फल ना पाये,
ये प्रकृति का दस्तूर नहीं ॥
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