आज ये मौषम इतना नम क्यों है।
कहि आज फिर उसकी आँखे तो नही रोइ है।
और खुले आशमा में ये काली घटा छाई है।
लगता है आज उसे फिर मेरी याद में नीं� read more >>
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ना कुछ देना था अपने हाथों में।
ना कुछ लेना था अपने हाथों में।
वो सब उस खुदा के हाथ है।
वो कब लेता है कब देता है।
ये सब उस खुदा read more >>
तेरी छाया में खुद को महफूज रखती हूं,
ना फिक्र किसी बात की कैन्हया,
ना दुनिया की खबर रखती हूं,
तेरी हूं, तेरा ही ख्याल रखती हूं,
जय श्री कृ read more >>