हम यूं ही बोझ उठाते रहे ,
लोग आते रहे लोग जाते रहे ,
मेहरबानी उस अल्लाह _ताला की __
जिसकी बदौलत हम चार पैसे कमाते रहे ।
___शिव किशोर ,शाहजहां� read more >>
की अब वो अपने फुरसत के लम्हों में हमें याद करते हैं..
मिलना तो मुमकिन नहीं होता तो बस फोन पे बात करते हैं,
हमसे कहते हैं की वो अपने कामों � read more >>