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शायरी
Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जो लोग मेरे सकल से मुझे जज करते थे।आज देखो बही लोग मेरे मरने के बाद मेरी ही तसबीर को अपने प्रोफाइल फोटों फेसबुक पर अपलोड कर रहे है। सि
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब किताबो से ज्यादा मोटिवेशनल इंसानों से ही मिल रही है।क्योंकि पहले किताबों में पढ़े थे आज इंसानों में देखाई दे रही है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
हम जब गरीब थे तो मुझे कोई जानने बाला नही था लेकिन आज मेरी काबिलियत को देख कर लोगों को मेरी शोहरत पसन्द नहीं आई और उसकी कीमत मेरी जान से
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
पांच बार आबाज दे कर बुलाई जाती है मगर कोई भी उसके तरफ मोतोबज्जे नही होता है।लेकिन ख्वाहिश रखते है डायरेक्ट जन्नत में जाने की।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
नमाज को भी पैसे के जैसा तरबियत दो शाहब क्योंकि पैसे से सब कुछ मिल जायेगी।लेकिन जन्नत कहां मिलेगी जो बिना पैसे के ही मिलती है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
कोइ भी इंसान बुरा नही है शाहब बस तुम्हारे जरूरत के हिसाब से अच्छा और बुरा दिखाई दे रही है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सब के साथ रहो पर जरूरत पर किसी को काम नही आओ यही सिख लोगों ने दे रखी है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मैं वैसा ही हूं यार जैसा तुम सोंच रहे हो क्योंकि ये ज्ञान मुझे तुम लोगों से ही सिख रखा है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
ज्यादे तो पढ़ा लिखा नही हूं जो ज्ञानी बन जाऊं लेकिन एक बात सच है जो बात किताबों से नही सीखा है वो बात लोगों ने सीखा दी है झूठ बोलना।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब लोग सच को ही झूठ समझ रहे है तो सच क्यों बोल रहे हो।क्योंकि सच बोल के तुम इतिहास तो नही बदल सकते लेकिन खुद को जरूर बदल दोगे।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब लोग सच को ही झूठ समझ रहे है तो सच क्यों बोल रहे हो।क्योंकि सच बोल के तुम इतिहास तो नही बदल सकते लेकिन खुद को जरूर बदल दोगे।
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जीविका
जीविका कभी इस धूल , धुएँ से एलर्जी थी मुझको रिज़्क़ की तलाश में सब सर-माथे लगा लिया. (रिज़्क़- जीविका )
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