Nisha Kumari 05 Jul 2026 कविताएँ समाजिक मां की ममता 1175 0 Hindi :: हिंदी
मां से होता शुरू ये संसार है जिसके बिना सुना घर द्वार है मां से होती है घर की रौनक न हो तो त्यौहार भी बेकार है।। जन्म देना एक भयावह दर्द के बाद हाथ थामे रहती है दिन रात कभी नहीं थकती जिसकी आंखे मां ही है इस जीवन की आधार।। बच्चों से शुरू होता उनका यह जीवन खत्म होता भी उन्हीं पर है ठेस कभी पहुंचे न किसी को सोचती वो बार बार है।। ममता की छांव में हमे सुलाती मुश्किलें आए तो खुद ही लड़ जाती सही गलत का फर्क भी है समझाती बैर नहीं किसी से रख पाती ।। अपने हिस्से का निवाला भी बच्चों को खिलाती लुटाती प्यार भी बेशुमार है थक जाती है कभी फिर भी नहीं जताती बच्चों में ही बसा उनका यह संसार है।।