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देश द्रोपदी सी ड़री सकपकाई घबराई दुशासन नीडर सा धुम रहा राजा धृतराष्ट्र सा लाचार है दुर्योधन बे खौफ हो घुम रहा प्रजा को पांडव समझ � read more >>
चित्र बदल रहा या फिर चरित्र समझ मे आता नही ये तस्विर सुना है कीसि से की देश बदल रहा क्या मैं अंधा हो गया हूँ कुछ दिखता नहीं अभी अभी त� read more >>
तु खड़की पे नही फिर भी गुलाब फेक आया हूँ ये दिल किस वेशर्मी पे उतर आया है जिधर जाऊ उधर तु ही तु दिखता हैं घर के दरबाजे पे छत पे गली क� read more >>
तु जीद है मेरी की तुझे पा सकु अपने कल्पनाओं मे तुझे उडा सकु हर बक्त तु रहता है मुझ मे ही मैं एैसा क्या करू की तेरे दिल मे खुद को बसा स� read more >>
ये दीप थोड़ा तु जल थोड़ा मै पिघलता हूँ बस इतना रहम करना न तु बुझना न बुझने देना राह बहुत है मूशकिलो भरा कुछ जहरीला कुछ पथरीला बस एक करम read more >>
कुछ तो बात है मोहब्बत मे बरना प्यार के लिए ताज महल कौन बनाता है कोई तो कीडा ज़रूर दफन है सिने मे जो मोहब्बत के आग लगाता है सायद मुझे � read more >>
मैं तब भी तेरा ही आशिक था और अब भी बस कुछ हम बदल गए थोडा हालात बिगड गया बाकी मैं बही ज़ाजबात बही येहसाश बही आज भी तेरे लिए ही धाडकता है read more >>
ईश्वर के दिया हुआ आदमी को अनमोल भेट जो जाहिलों को भी इंसान बनाती जानवरों मे भी प्रेम जगाती भटके को राह देखाती जीवन मे रंग भर देती है read more >>
मैं ता ति था थी रा री का कि ना नि हमेशा मुझे कन्फुज करता करती है इसलिए मैं जब भी कुच्छ लिखता हूँ बिना भेद भाव किये मैं ति और ता का प्र read more >>
पत्नी जी ने आज बडा ही प्रेम से सोते से जगाया . अपने मधुर मधुर बानी से कहा . क्यो आज काम पर नही जाना है कमा के नही लाना है. कमाओ गे नही तो � read more >>
उल्झे है हम उल्झन मे सुल्झने का युक्ति नही उल्झन भि उल्झन जैसी सुल्झने का कोई उपायेनही ये उल्झे उल्झन से कब सुल्झेगे पता नही. अपन read more >>
जब इन्सान के पास कई ऑफर होते है तो वह कन्फ्यूज हो जाता है। वह डिसाइज नही कर पाता है कि उसे क्या चाहिए होता है और वह गलत डिसिजन ले लेता है। read more >>
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