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कविता -ख्वाइश सुख जैसे कुछ पाने की दुःख जैसे कुछ खोने की कुछ खाने कुछ पीने की जग में जीवन जीने की "ख्वाइश"है। नभ में खग सा उड़ने read more >>
प्यार हो जाता है प्यार करना नहीं पड़ता प्यार का नाम दोस्ती भी है प्यार एक अनमोल तोफा है प्यार अगर सच्चा हो तब ज़िन्दगी बन जाए प्यार म� read more >>
खुद पे यकीन करो तुम खुद पे शक मत करो तुम खुद को कम मत समजो तुम तुम्हारे में भी है वो बात तुम किसी से कम नहीं हो तुम कर सकते हो तुम में ह� read more >>
मेरे हृदय में तुम हो - पर मेरे प्रेम से अलक्षित तुम हो , तारों से झिलमिलाता आसमान ; अंग - अंग में तेरी प्रेम का पहन - वसन - मुस्कान तेरी चाँ� read more >>
आ पंछी तुझे उड़ना सिखा दूं उड़ने में है कितना मजा उसका आनंद लेना सिखा दूं पंख -पखेरू तू उड़ जाना आसमां को तू छू जाना फिर न कभी जमीं में read more >>
मैं क्या गई आपको छोड़ के आपने तो मुझे क्या ,मेरी यादों को भी कहीं दूर दफना दिए सोची थी ,कुछ देर की बात है हम संभल जाएंगे पर क्या पता था क� read more >>
गुरूत्व ज्ञान और मान गुरू, शीष्य सार्थ्य है सम्र्पण से! है अचल धरा कि धार - धार, गुरू ज्ञान के दर्पण से!! जो अंधकार कर दुर दे आभा, read more >>
तुमने मुझे..खो दिया... ठीक वैसे ही..जैसे 'बसंत' में 'पेड़'..खो देता हैं 'पत्तों' का साथ... या वैसे..जैसे रह जाता है.. एक 'बूंद' तन्हा...'शाखों' पर 'ब� read more >>
हर शाम तेरे इंतजार में चौखट पे बैठ तेरी राह तकती कब आओगे यही सोचकर मेरी आंख भर जाती काश! ओ दिन भी आए कहीं किसी रोज हम मिल जाएं विरहा � read more >>
शीर्षक (आम) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) आम फलों का राजा है। ये सबके मन को भाता है। ये सबके मन को ललचाता है। इसे खाये बिना नहीं रहा जात read more >>
है धरती पर नाज़ पिता, संघर्षों कि आवाज़ पिता! पुरूष कर्म इक नाम पिता का, सन्तान कर्म पर साज़ पिता!! है धरती कि महा धरा पर, read more >>
जाने कहां वो दिन गए हम इस जहां में कहां खो गए घड़ियां मिलन की कब बन गई , दूरियां हमको इसकी खबर भी नहीं आती है मुझको वो लम्हें याद जिसको read more >>
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