शरद भूषण मोंगरा 14 May 2026 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत प्रेम, उलफत,निवेदन, अर्ज ए उलफत 5886 0 Hindi :: हिंदी
"अर्ज ए उल्फत" अब अर्ज ए उल्फत मान लो आहिस्ता आहिस्ता जब दिल तुम ही पर आगया आहिस्ता आहिस्ता। अब क्या करें क्या ना करें ये वक्त नहीं है इस दिल पे इख्तियार भी कंबख्त नहीं है चल प्रेम की दो बात कर कट जाएगा रास्ता अब अर्ज ए उल्फत मान लो आहिस्ता आहिस्ता। तू चिलमन की ये दीवार हटा खोल दे पर्दा दुनिया की नफरतों का खूब उड़ने दे गर्दा हम कैसे तुमसे दूर रहें यों हफ्ता हफ्ता अब अर्ज ए उल्फत मान लो आहिस्ता आहिस्ता। मालिक की मौज हो गई दीदार हो गया तुझको भी एतबार मुझसे प्यार हो गया अब इशके रंग चढ़ने दे हर रोज रफ्ता रफ्ता चलो अर्ज ए उल्फत मान लो आहिस्ता आहिस्ता। शरद भूषण मोंगरा कवि गीतकार लेखक