Poonam Mishra 17 Jun 2023 ग़ज़ल समाजिक कोई चाहत नहीं है 26422 0 Hindi :: हिंदी
कोई चाहत नहीं है मुझ में ! कोई उम्मीद भी नहीं है मुझ में! शायद !इसीलिए जिंदगी मेरी वीरान है ! कोई आस भी नहीं है! जितना मिल जाए वह भी बहुत है ! कई रास्ते मै खुद से निकालती हूं! दूसरों की राह पर चलती नहीं मैं! शायद इसीलिए जिंदगी मेरी वीरान है! चाल चलने की आदत नहीं है! मुझ में दूसरों की चाल से वाकिफ हु खूब मैं शायद इसीलिए जिंदगी मेरी वीरान है