मोती लाल साहु 25 Aug 2025 ग़ज़ल अन्य खोज, प्रेरणा, आत्मज्ञान, शायरी, ग़ज़ल 11845 0 Hindi :: हिंदी
वो जन्नत वहां है, दरबार मेरे मुर्शिद का, वो शांति वहां है, ज्ञान मेरे मुर्शिद का। जहां मेरे मुर्शिद का है बसेरा, वहीं बरकरार-ए-कायनात है। वो मेरा मुर्शिद, हुजूर-ए-खास तेरा-मेरा है। -मोती