मोती लाल साहु 21 May 2026 ग़ज़ल धार्मिक #SpiritualPoetry #HindiGhazal #SufiKavita #MotiPoetry #BhaktiRas #InternalPeace #SelfRealization 3411 0 Hindi :: हिंदी
बीते रे दिन-ओ-रैन, गया क्षण-क्षण ये जीवन, आती-जाती सांस में, छुपा बैठा है राम। खोया रहा तू उम्र भर, इस माया-नगर में, देखा न दिल को चीर कर, जहाँ रहता है राम। कस्तूरी कुंडल बसै, तू ढूंढे वन-वन, तीरथ में जिसे खोजता, वो घट-घट में है राम। पिंजरा ये 'मोती' कांच का, इक दिन है टूटना, पहचान अपनी आत्मा, जो सचमुच में है राम। -मोती