Naresh kumar 30 Nov 2025 ग़ज़ल दुःखद नमक, ज़ख्म, पत्थर, सफ़र, तरक्की,,सुकू, जिंदगी, दर्द, आंसू 12065 0 Hindi :: हिंदी
ग़ज़ल नमक से हाथ जख्मों को, मिलाना पड़ता है कि मजबूरी मे तुझसे, मिलने आना पड़ता है पता है चोट देगा,पर सफर में साथ तो है हमें पत्थर से हंसके,दिल लगाना पड़ता है मेहरबां न हो किस्मत तो तरक्की, यूं नहीं मिलती सुकू दिन दिन रात का, इसमें लुटाना पड़ता है कि आने में हुई देरी,मगर मेरी भी सुनो तो सफ़र के बीच में मेरे,जमाना पड़ता है कि पूरा भर चुका है,जी हमारा जिंदगी से मगर अपनो की खातिर, दिल लगाना पड़ता है मजा लेते हैं अपने भी, बुरे हालातों में हमे अब दर्द आंसू से, छिपाना पड़ता है