मोती लाल साहु 01 Nov 2025 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत #नूर_ए_इश्क़ #मुद्दत_के_बाद #रूह_को_मिली_उल्फ़त #ज़िक्र_ए_यार #सूफ़ी_ग़ज़ल #मोती 9784 0 Hindi :: हिंदी
ये जिस्म-ओ-जाँ में कैसी है रंगत मुद्दत के बाद। नूर-ए-इश्क़ है, क्या तेरी सरवत मुद्दत के बाद। नफ़स-नफ़स में अब ये कैसी दौलत ठहर गई, मिली रूह को रब की उल्फ़त मुद्दत के बाद। ग़म-ओ-फ़िराक़ से दिल ने जो पाई थी नजात, सजा है महफ़िल-ए-दिल की फ़ुर्सत मुद्दत के बाद। धाम-धरती जन्नत-हीं-जन्नत बनाया जी, यहां जर्रे-जर्रे में बसता ख़ुदा... ये ज़िक्र-ए-यार ही है जो पर्दा हटा गया, खुली है चश्म-ए-दिल पे हक़ीक़त मुद्दत के बाद। वो ज़र्द पत्ता अब साया-ए-गुल बन गया 'मोती', मिली ख़ाक को तेरी बरक़त मुद्दत के बाद। -मोती