नरेंद्र भाकुनी 30 Mar 2023 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत भारतवर्ष, उतराखंड , पूरब, पश्चिम, उत्तर ,दक्षिण, मंदिर, पंजाब, अमित शाह, आदित्यनाथ योगी, नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत, रश्मि जोशी,, किरण, वेंकटेश्वर मंदिर उर्दू 65455 0 Hindi :: हिंदी
नुसरत_ ए_ _मौहब्बत सबका साथ बांटने चला हूं। तकल्लुफ करके देखना जरा पहरों को आठ बांटने चला हूं। खुशामद तो मैंने बहुत की थी चांद _सूरज की रात को दिन और दिन को रात बांटने चला हूं। रात का चिराग बुझ गया तो क्या हुआ? शमा का बरकरार बाकी है। यह कमबख्त इश्क भी क्या चीज है इसका ऐतबार बाकी है। इकबाल तो मेरा तुम बनकर देख लेना अभी तुम्हारा इंतजार बाकी है। यूं तो चांद की नजाकत मांग ली थी हमने उस तनाज़ की इबादत मांग ली। थोड़ी सी सहम गए थे हम खुदा की दुवागत मांग ली। इस धरा को जन्नत बना दिया उस दुआ ने हमने अपने इश्क कीइजाजत मांग ली। जब दो दिल्ली दरिया में मिलते हैं जब फूल गुलशन में खिलते हैं । बहारों की भी क्या कशिश है? डाली _डाली , पत्ता _ पत्ता हवा से हिलते हैं।