भूपेंद्र सिंह 21 Dec 2023 ग़ज़ल समाजिक बदले की चिंगारी गजले 48071 0 Hindi :: हिंदी
सब कुछ होता है अच्छे के लिए, ये सुनते सुनते कान पक गए, एक बदले की आग को अब हृदय में जलाना चाहिए। चलते चलते हम हैं थक चुके, अब अंबेडकर जैसा व्यक्ति मदद के लिए बुलाना चाहिए। कुछ कर दिखाने की लालसा भर लो हृदय में, इन मुस्किलो को अब चैन की नींद सुलाना चाहिए। बहुत देख लिए हमने हार के मंजर, अब एक गीत सफलता का गाना चाहिए। थक गई उड़ते हुए अब ये कली, इस चिड़िया की चोंच में अब दाना चाहिए। बहुत फिसल लिए ऊंचे ऊंचे पहाड़ों से, अब रास्ते के हर एक पत्थर को पिघलाना चाहिए। कब तक खड़े रहेंगे हम यूं ही गूंगे बनकर, अब दरिया के पार रास्ता बनाना चाहिए। अब अपने हृदय में जुनून के पंख पैदा कर, ये जमाना ऊंची उड़ान देखता है। ये जमाना महान लोगों का ही गुणगान देखता है, ये दुनिया अलग सी ही नजर आती है, जब कोई बनकर महान देखता है। अगर मरना ही है तो फिर मर जा, जहां पर खड़े होकर क्या शमसान। देखता है।। अगर तुझमें कोई खूबी है तो फिर खुद पे गुमान होना चाहिए, हां मगर अपने हुनर पर थोड़ा सा काम होना चाहिए, अगर आप किताबे इश्क से गुजर गए, तो फिर आपका गुणगान होना चाहिए, दुनिया की नज़र में भले ही ना सही, पर अपनी नजर में हर एक को महान होना चाहिए। अगर सफलता की कलम आपके हाथो में हैं, तो फिर सारी दुनिया को आपका गुलाम होना चाहिए।। आओ एक बार मां के लिए कुछ करके देखे। एक बार ही सही पर अपने देश के लिए मरके देखे। गुरूर को हटाकर आज खुदा से थोड़ा डरकर देखे।। भूपेंद्र सिंह रामगढ़िया।।